विद्युत नियामक आयोग द्वारा रियायती दरों पर बिजली उपभोग की सुविधा छीने जाने पर विभागीय कर्मचारी बुधवार को भड़क उठे। इस फैसले के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े कर्मचारियों और पेंशनरों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय में प्रदर्शन कर धरना दिया। बाद में आयोग अध्यक्ष के नाम एसई आरके अग्रवाल को ज्ञापन देकर एलएमवी-10 सुविधा पूर्ववत बहाल करने की मांग की।
बता दें कि एलएमवी-10 के तहत पॉवर कारपोरेशन के विभिन्न संवर्गों से जुड़े नियमित और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को रियायती दरों पर बिजली उपभोग की सुविधा मिलती रही है। इसके तहत कर्मचारियों के वेतन से बिजली बिल के तौर पर निश्चित धनराशि की कटौती होती रही है। हाल ही में विद्युत नियामक आयोग ने यह सुविधा वापस लेकर वास्तविक बिल भुगतान के लिए विभागीय स्टाफ के कनेक्शनों पर भी मीटर लगाने का फरमान जारी कर दिया।
इसी के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन करके अपना आक्रोश जाहिर किया। एसई अग्रवाल को दिए ज्ञापन में कहा गया है कि एलएमवी-10 सुविधा वापस लेने से 25 जनवरी 2000 को प्रदेश सरकार, ऊर्जा विभाग और कर्मचारी नेताओं के मध्य हुए समझौते का उल्लंघन होगा, क्योंकि समझौते से सहमति बनी थी कि कर्मचारियों को प्राप्त सुविधाओं में किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी।
ज्ञापन में विद्युत सुधार अधिनियम 1999 के अध्याय-6 नियम-23 के तहत कर्मचारियों की सभी सुविधाएं पूर्ववत बहाल रखे जाने की व्यवस्था का पालन कराने का आग्रह किया गया है। धरना-प्रदर्शन में समिति के अध्यक्षि केके खुराना, सचिव एए मलिक, शैलेंद्र पांडेय, अनुज श्रीवास्तव, रामविलास शर्मा, के=के शर्मा, विनोद यादव, सुखपाल सिंह, बशीर बाबू, जगत सक्सेना, संजीव तिवारी, रेहान वसीम, विष्णु पाल, जेके अवस्थी, सत्येंद्र कुमार आदि शामिल रहे।