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उपडाकघर घोटाला : हस्ताक्षर मिलान के लिए एफएसएल भेजे जाएंगे अभिलेख

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अल्हागंज। उपडाकघर में खातेदारों की जमा करोड़ों की रकम के बहुचर्चित घोटाले की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। मंगलवार को डाक विभाग के अधिकारी मामले से संबंधित मूल अभिलेख लेकर थाने पहुंचे। यहां से हस्ताक्षर मिलान के लिए मूल अभिलेख विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजने का पुलिस ने निर्णय किया।
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पुलिस को डाक विभाग से प्राप्त कराए गए मूल अभिलेखों में खाताधारकों के खाते, रकम निकासी के प्रपत्र, आवेदन पत्र तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। एफएसएल के विशेषज्ञ संबंधित दस्तावेजों पर दर्ज हस्ताक्षरों का खाताधारकों के वास्तविक हस्ताक्षरों से मिलान करेंगे। पुलिस के अनुसार एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित निकासी प्रपत्रों पर हस्ताक्षर वास्तविक हैं अथवा उनमें किसी प्रकार की कूटरचना की गई है।
गत वर्ष जुलाई में उपडाकघर में बड़े पैमाने पर हुआ वित्तीय घोटाला उस वक्त सामने आया था, जब कई खाताधारकों ने अपने खातों में जमा लाखों रुपये की रकम बिना उनकी जानकारी के निकाल लिए जाने की शिकायत की थी। आरंभिक जांच से पता चला कि कुछ खाताधारकों से धनराशि जमा कराकर उन्हें फर्जी रसीदें और पासबुक उपलब्ध कराई गईं, जबकि कई खातों से अनधिकृत रूप से धन निकासी की गई।
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विभागीय जांच रिपोर्ट में तत्कालीन उपडाकपाल नवीन आर्य, डाककर्मी सूरजप्रकाश तथा उसके पुत्र रितिक की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद तीनों के विरुद्ध थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अब तक 25 खाताधारकों के बयान दर्ज होने से 1.20 करोड़ रुपये के गबन की जानकारी मिल चुकी है।
थाना प्रभारी ओमप्रकाश के अनुसार अब मूल अभिलेख प्राप्त हो चुके हैं और उन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि विवेचना अब अंतिम चरण में है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
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