निगोही (शाहजहांपुर)। खुद को गोली मारने वाला छात्र अनूप पढ़ने में काफी होशियार था। परिवार को भी उससे काफी उम्मीदें थीं। अनूप कुछ बनकर घर की बदहाली दूर करना चाहता था, लेकिन आर्थिक तंगी ने उसे इतना निराश कर दिया कि उसने अपना जीवन खत्म कर दिया।
निगोही कस्बा निवासी परमेश्वरदयाल, दृगपाल और राजेंद्र तीन भाई हैं। तीनों के परिवार एक ही घर के अंदर अलग-अलग कमरे में रहते हैं। जमीन न होने की वजह से तीनों भाई मजदूरी करते परमेश्वरदयाल खेतों या जहां काम मिल जाता वहां पर मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। परमेश्वर दयाल के तीन बच्चों में दो बेटे और एक बेटी हैं। बेटी अनुपम (19) सबसे बड़ी है। छोटा बेटा आशीष तीन साल का है। मां भी परमेश्वरदयाल के साथ रहती हैं। अनूप (17) तंगहाली में रहने के बावजूद पढ़ने में काफी अच्छा था। पिता के मुताबिक वह तीन दिन से फीस के लिए आठ हजार रुपये मांग रहा था। इतनी रकम एक साथ जुटा पाना बहुत मुश्किल था। बेटे के कहने के बाद उन्होंने कई जगह रुपयों का जुगाड़ करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कहीं से मदद नहीं मिल सकी। बुधवार को जब बेटे ने दोबारा रुपयों के लिए कहा तो परमेश्वर दयाल को मजबूरी में हाथ खड़े करने पड़े। अनूप को लगा कि फीस जमा नहीं हुई तो वह परीक्षा में नहीं बैठ पाएगा, जिससे उसका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। पढ़ाई में आ रही बाधा अनूप को इतनी नागवार गुजरी कि उसने कमरे में जाकर अपनी कनपटी में तमंचे से गोली मार ली। बेटे की मौत के बाद परमेश्वरदयाल अपनी आर्थिक लाचारी पर फूट-फूटकर बिलख रहे हैं।
ध्यान हटाने का प्रयास करें
बच्चा जब ऐसी परिस्थितियों से गुजर रहा हो तो उसे निराश न होने दें, उसे प्रोत्साहित करें। उसके साथ मित्रवत व्यवहार करें। बच्चे का ध्यान उस ओर से हटाने का प्रयास करें। अगर दिन-रात बच्चे के दिमाग में अपनी कमजोरी को लेकर चल रहा है तो उसे दूर करने की कोशिश करें। - डॉ. संजीव सिंह, मनोचिकित्सक
छोटे भाई के जन्मदिन पर बड़े ने जान दी
परमेश्वर दयाल के सबसे छोटे बेटे आशीष का बुधवार को जन्मदिन था। परिवार जन्मदिन मनाने के लिए तैयारी कर रहा था। घर की पुताई की जा रही थी। घर में खुशियों भरा माहौल था। अनूप की मौत से खुशियों भरे घर में कोहराम मचने लगा।
बड़ा सवाल... छात्र के पास तमंचा कहां से आया
परमेश्वरी का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उसके पास बेटे की फीस जमा करने तक को रुपये नहीं हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अनूप के पास तमंचा कहां से आया। उसे तमंचा दिया किसने था। इससे पहले भी तमंचे से फायरिंग, हत्या और आत्महत्या के मामले सामने आते रहे हैं। इससे साफ होता है कि किसी के लिए भी तमंचा लेना कितना आसान बना हुआ है। हालांकि पुलिस अभी जांच कर रही है कि तमंचा आया कहां से था।
साल की पूरी फीस लगभग 38 सौ रुपये
इंटरमीडियट की कक्षाएं अभी नहीं लग रही हैं। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक फिलहाल किसी भी छात्र से फीस नहीं मांगी गई है। 12वीं कक्षा के पूरे साल की फीस लगभग 38 सौ रुपये है। - सर्वेश कुमार यादव, प्रधानाचार्य सुभद्रा देवी महेश चंद्र इंटर कॉलेज
अनूप के पास तमंचा कैसे पहुंचा, इसकी जांच कराई जा रही है। फिलहाल पिता के मुताबिक फीस न मिलने पर आत्महत्या की बात सामने आई है। किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले तथ्य और लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
- प्रमोद कुमार, निगोही थाना प्रभारी निरीक्षक