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पानी के सस्ते पाउच परोस रहे पेट की बीमारियां

Wed, 24 May 2017 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
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पानी - फोटो : अमर उजाला
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पानी की तिजारत करने वाले शुद्धता से बेपरवाह
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फिल्टर्ड वाटर के नमूने लेने में अधिकारी उदासीन
भीषण गर्मी में प्यास लगने पर सूखा गला तर करने को ठंडे पानी की चाह हर किसी को होती है। ऐसे में वाटर प्लांट से सप्लाई होने वाले कंटेनरों और सस्ते पाउचों केे पानी की खपत बढ़ गई है, लेकिन यह पानी पेट की बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है, क्योंकि इस पानी में शुद्धता के मानकों की अनदेखी की जा रहे हैं। खास यह है कि नामकरण संस्कार से लेकर शादी-ब्याह जैसे समारोहों में जिस पानी की धड़ल्ले से सप्लाई हो रही है, खाद्य सुरक्षा विभाग उसके नमूने भरने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। 
 
भूगर्भ जल के नमूनों में मिल चुके हानिकर तत्व
भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार नदियों में कल-कारखानों का विषाक्त कचरा बहाए जाने और अन्य स्रोतों से गंदगी की मिलावट अधिकांश राज्यों के भूगर्भ जल भंडार को प्रदूषित कर रही है। यूपी की बात करें तो भूगर्भ जल परीक्षण में कैल्शियम, फास्फोरस, बोरोन, सीसा आदि घातक तत्वों समेत भारी धातुओं की मात्रा बढ़ रही है। पर्यावरण की निगरानी को समर्पित संस्था पृथ्वी द्वारा शहर की दोनों नदियों समेत हैंडपंपों के पानी के नमूनों की जांच में भी यह सभी विषैले तत्व अधिक मात्रा में पाए जा चुके हैं। 
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बड़े पैमाने पर खपाया जा रहा फिल्टर्ड वाटर  
गर्मी बढ़ने के साथ पानी का धंधा गरमाया तो शहरी क्षेत्र में करीब डेढ़ दर्जन चिलर प्लांट ठंडे पानी को फिल्टर्ड बताकर जन सामान्य में परोसने लगे हैं। चार-पांच चिलर प्लांट इसी सीजन में चालू हुए हैं। यह वाटर प्लांट रोजाना 15 लीटर वाले करीब पांच हजार कंटेनर और सवा लाख पानी के पाउच सप्लाई कर रहे हैं। कहने को इन सभी ने पेट की बीमारियों में अशुद्ध पानी की भूमिका से जुड़े चिकित्सा विज्ञान के निष्कर्षों को अपनी ढाल बना रखा है। इसीलिए पानी के कारोबारी शुद्धता के मानकों का ढोल पीटते नहीं थकते, लेकिन कई जल संशोधन संयंत्र गंदगी से घिरे हैं। कई प्लांट की पुरानी मशीनरी पर काई और जंक ने डेरा जमा लिया है।  
 
ब्रांडेड पानी के नमूने में अधिक मिला फ्लोराइड
पानी का धंधा करने वाली नामी कंपनी एक्वाफिना शुद्धता की कसौटी पर फेल हो चुकी है। गत वर्ष शिकायत के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक ढाबे से इस ब्रांड की बोतल के पानी की जांच कराई तो पता चला कि उसमें दांतों और हड्डियों के लिए घातक फ्लोराइड की मात्रा 33 फीसदी ज्यादा है। वर्ष 2015 में मोहम्मदी रोड पर गांव करौंदा हार स्थित श्रीराम खन्ना की फैक्ट्री मेसर्स एक्वा प्रॉडक्ट्स से नीरो ब्रांड पानी की जांच कराने पर उसकी पैकेजिंग और लेवलिंग में गड़बड़ी पाई जा चुकी है। ऐसे में बिना किसी ब्रांड नेम के बिक रहे पानी की शुद्धता का आकलन आसानी से किया जा सकता है। 
 
चालू सीजन में नहीं लिए गए पानी के नमूने
बाजारों में बिकने वाले पानी की समय-समय पर हुई जांच में अशुद्धता प्रमाणित होने के बावजूद चालू सीजन में अभी तक पानी का कोई नमूना नहीं लिया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहीत अधिकारी टीआर रावत के अनुसार केंद्र सरकार की अथॉरिटी वाटर चिलिंग प्लांट को लाइसेंस देती है और वहां से सप्लाई होने वाले पानी की जांच नगरपालिका परिषद के स्तर से कभी-कभार कराई जाती है। खुला पानी सप्लाई करने वाले लाइसेंसिंग परिधि में नहीं आते। इसलिए ऐसे प्लांट के सिर्फ जल स्रोत की जांच की जाती है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीपी सिंह के अनुसार जनहित को ध्यान में रखते हुए जिले में चिलर प्लांट सूचीबद्ध कराए जा रहे हैं। 
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प्यूरीफाइड के बजाय उबला पानी भरोसेमंद
पानी में भारी तत्वों की अधिकता पेट को परेशान करने के साथ त्वचा रोग, घेंघा, नर्वस ब्रेकडाउन, किडनी डैमेज आदि समस्याएं पैदा करती है। फ्लोराइड की अधिक मात्रा दांतों और हड्डियों को बेहद नुकसान पहुंचाती है। बाजार में ऐसे प्यूरीफायर भी हैं, जो लाभप्रद खनिजों का भी पानी से सफाया कर देते हैं। हर कोई प्यूरीफायर खरीदने की क्षमता भी नहीं रखता। इसलिए गर्मी में सेहत को सामान्य रखने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि पानी को उबालने के बाद छानकर 10-12 घंटे के अंदर इस्तेमाल कर लें। बोतल में रखे उबले पानी में बैक्टीरिया पनपने की आशंका बनी रहती है। इसलिए पानी उबालकर चौड़े मुंह के ऐसे जार में रखा जाए, जिसकी सफाई आसानी से हो सके।   
-डॉ. राजीव सिंह, फिजीशियन
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