शाहजहांपुर। फिल्मों के पटकथा लेखक मोअज्जम बेग ने वेबसीरीज में गाली-गलौज और अश्लील शब्दों के प्रयोग पर चिंता व्यक्त की। बोले- पहले के सिनेमा में गलत शब्दों का प्रयोग नहीं होता था। कोविड-19 के दौरान वेब सीरीज का प्रचलन बढ़ने पर इसके प्रयोग में बढ़ोतरी हुई है। वेब सीरीज की निगरानी के साथ ही मापदंड भी तैयार होने चाहिए।
रॉकस्टार, सड्डा-अड्डा समेत कई फिल्मों के लेखक मोअज्जम बेग मंगलवार को शाहजहांपुर में थे। अपने बाडूजई स्थित आवास पर बातचीत करते हुए बेग ने बताया कि सिनेमा पर सेंसर बोर्ड की निगरानी पहले की अपेक्षा ज्यादा बढ़ी है। इसके फायदे और नुकसान दोनों हैं। फिल्मों में बढ़ते अश्लील शब्दों को लेकर सेंसर बोर्ड संवेदनशील हो गया है।
बोले : मिर्जापुर वेब सीरीज को लोगों ने पसंद किया, लेकिन कुछ लोगों को मिर्जापुर नाम को लेकर दिक्कत हो गई। उन्होंने शहर को बदनाम करने की बात कही। लोग फिल्मों को लेकर केस करने लगे तो सेंसर बोर्ड भी सतर्क हो गया। उन्होंने माना कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई सीरीज में सीमा पार हो रही थी। उसे रोकने के लिए सरकार को आगे आना पड़ा और कई एप बढ़ती अश्लीलता को लेकर प्रतिबंधित भी किए। बेग ने कहा कि लेखक होने के नाते अश्लीलता को लेकर मापदंड होना चहिए।
24 अप्रैल को रिलीज हुई फुले फिल्म
24 अप्रैल को रिलीज हुई फिल्म फुले में स्क्रीनप्ले और संवाद में मोअज्जम की भूमिका रही। बोले-ऑस्ट्रेलिया के फिल्म मेकर के साथ इंडिया और आस्ट्रेलिया पर आधारित फिल्म की स्टोरी पर कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त बिहार में पुलिस पर आधारित वेब सीरीज को लिख रहे हैं। इसमें कई बड़े एक्टर नजर आएंगे।
बहुत दिन बाद आई प्रेम कहानी, दर्शकों ने किया पसंद
अपराध और जासूसी वाली फिल्मों के दौर में सैयारा जैसी फिल्म की कामयाबी पर मोअज्जम बेग कहते हैं कि लंबे अंतराल के बाद पूरी तरह से प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म रिलीज हुई, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। वर्तमान समय में युवा कहीं न कहीं संवेदनशील हैं, जिसे देखते हुए फिल्म की पटकथा को लेखक ने तैयार किया है।