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सुविधाएं मिलें तो ओलंपिक में मेडल जीतने का दम रखते हैं जिले के युवा

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शाहजहांपुर। ओलंपिक खेलों की शुरुआत शुक्रवार से टोक्यो (जापान) में होने जा रही है। इसमें भारत से भी विभिन्न स्पर्द्धाओं में खिलाड़ी प्रतिभाग करेंगे।
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जिले के तमाम खिलाड़ी ऐसे हैं जो ओलंपिक में खेलने का सपना संजोए हैं। उनका कहना है कि अगर सुविधाएं मिलें तो वे अपने देश का नाम रोशन करने में पीछे नहीं रहेंगे। वहीं ओलंपिक को लेकर खेल प्रेमियों में खासा उत्साह है और वे चाहते हैं कि इस बार भारत की झोली सोने से भर जाए।
नेशनल टीम में चयन के लिए प्रयास कर रहे शूटर विशू
मोहल्ला बहादुरगंज निवासी व्यापारी विनोद गुप्ता के बेटे विशू गुप्ता बचपन में गुब्बारे पर निशाना लगाते-लगाते नेशनल शूटर बन गए। साल 2018 व 19 में तिरुवनंतपुरम में आयोजित नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर चुके विशू अब भारत की टीम में जगह बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं और ओलंपिक खेलने का सपना संजोए हैं। विशू का कहना है कि टीम का हिस्सा बनकर ओलंपिक में गोल्ड जीतकर अपने देश का नाम रोशन करना उनका सपना है। विशू ने शूटिंग के खिलाड़ियों की पौध तैयार करने की योजना भी बनाई है।
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सिर्फ 12 साल के अभिमन्यु दौड़ में कमाना चाहते हैं नाम
दुर्गा इंक्लेव निवासी व जी-सर्जीवियर कंपनी में जनरल मैनेजर शशिकांत वाजपेयी के पुत्र अभिमन्यु वाजपेयी अभी 12 साल के हैं, लेकिन उनके हौसले आसमान छू रहे हैं। स्कूल में हुई दौड़ प्रतियोगिता में पहले स्थान पर आने के बाद स्टेट लेवल तक खेल चुके अभिमन्यु ओलंपिक खेलों में भारत की ओर से प्रतिभाग करने की इच्छा रखते हैं। बताया कि डॉ. सुदामा प्रसाद विद्यास्थली में कक्षा आठ में पढ़ते हैं। स्कूल में 200 मीटर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। हथौड़ा स्टेडियम में ओपन गेम हुए, तब 100 और 400 मीटर रेस में भाग लिया। जनवरी में स्टेट लेवल की दौड़ प्रतियोगिता मेरठ में हुई, उसमें 60 मीटर दौड़ में प्रतिभाग कर चुके हैं। ओलंपिक में खेल रहे भारतीय खिलाड़ियों के हुनर को टीवी पर देखकर चियर करेंगे।
दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत.... खेलों में चमक सकता है देश का नाम
पुवायां। पुवायां के गांव गुटैया निवासी अंकित पंवार का मानना है कि ओलंपिक खेलने गई देश की टीम संतुलित है और टीम के कई पदक जीतने की संभावना है। अंकित पंवार टर्की में वर्ष 2010 में और कुवैत में वर्ष 2011 में विश्व कुंग फू चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा वर्ष 2009 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में लखनऊ में और वर्ष 2010 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में मुंबई में उत्तर प्रदेश की टीम की ओर से खेलते हुए दो बार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। अंकित पंवार ने कहा कि ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले सभी खिलाड़ियों को वह बधाई देना चाहते हैं। उनको उम्मीद है कि सभी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करेंगे और देश के लिए कई पदक लाने में कामयाब होंगे।
पैरा खिलाड़ियों को सुविधाएं मिलेें तो किसी से कम नहीं
जलालाबाद के प्रतापनगर मोहल्ला निवासी कौशलेंद्र सिंह की बचपन में पेड़ से गिरने के कारण रीढ़ की हड्डी टूट गई थी लेकिन उन्होंने अपने हौसले को नहीं टूटने दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साल 1981 में जापान में पैरा ओलंपिक गेम हुए थे। इसमें उन्होंने व्हीलचेयर रेस में तीन स्वर्ण पदक जीते, साल 1982 हांगकांग में ऐशेपिक गेम की भाला फेंक प्रतियोगिता में रजत और व्हीलचेयर रेस में कांस्य पदक जीता था। 1978 में पुणे और उसके बाद कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। उन्हें सरकार से कोई सुविधा न मिलने का मलाल है। कहना है कि पैरा खिलाड़ियों को सुविधाएं मिलें, तो ओलंपिक में भी मेडल जीतेंगे।
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वर्तमान समय में किसी तरह का प्रशिक्षण स्टेडियम में नहीं दिया जा रहा है। शौकिया तौर पर खिलाड़ी अभ्यास के लिए स्टेडियम में आते रहते हैं। बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग, वॉलीबॉल, हॉकी, दौड़ आदि की प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहता है। कोविड-19 की वजह से प्रतियोगिताएं नहीं हो रही हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम में विभिन्न खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर ऊंचे स्तर तक पहुंचाने का प्रयास रहता है। - जितेंद्र भगत, जिला क्रीड़ाधिकारी
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