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Shahjahanpur News: पक्के मकानों से विलुप्त होने लगीं गौरैया...संरक्षण के लिए लगा रहे घोंसले

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सचिन कुमार, डीएफओ
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शाहजहांपुर। विश्व गौरैया दिवस शुक्रवार को मनाया जाएगा। वर्षों पहले कच्चे मकानों की मुंडेर पर बैठकर चहचहाने वालीं गौरैया अब पक्के मकानों पर नजर नहीं आतीं, लेकिन गांवों में अब भी गौरैया फुदकती दिख जाती हैं। गौरैया के संरक्षण के लिए तमाम लोग प्रयास कर रहे हैं। लोगों ने अपने घरों में गौरैया के लिए लकड़ी के घोंसले बनाए हैं, जिससे उनके आंगन में भी गौरैया फुदक सकें। ऐसे लोग दूसरों को भी गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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साजिद के घर के आंगन में सुबह-शाम फुदकती है गौरैया
जीएफ कॉलेज के प्रोफेसर डॉ.साजिद खान पर्यावरण प्रेमी होने के साथ ही गौरैया के संरक्षण के लिए भी काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने आवास में गौरैया के लिए लकड़ी के लगभग दस घोंसले लगाए हैं। इसमें सुबह और शाम गौरैया फुदकती हैं। वह दूसराें को प्रेरित भी करते हैं। साजिद बताते हैं कि कोविड के समय में जब लोग घरों में कैद थे, तब साहित्यपुरम कॉलोनी के प्रोफेसर रेजीडेंस के बच्चों को इकट्ठा कर गौरैया के घोंसला बनाना सिखाया था। प्लाई के घोंसले बच्चों ने अपने घरों में लगाए थे। आसपास के करीब 15 मकानों में अब भी घोंसले लगे हैं। साजिद बताते हैं कि उस समय काफी लोगों को घोंसले बांटकर गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित किया था।

पंकज के फॉर्म पर गौरैया ने बनाया ठिकाना
शहर के मोहल्ला खिरनीबाग निवासी पक्षी प्रेमी पंकज बाथम के फॉर्म हाउस पर गौरैया का आशियाना है। उन्होंने गौरैया के लिए घोंसले, मटके आदि लगा रखे हैं, जिसमें गौरैया ने अपना ठिकाना बना रखा है। पंकज बाथम ने बताया कि काफी समय पहले जब गौरैया संरक्षण के लिए लोगों ने मुहिम शुरू की थी तब उनके अंदर चेतना जागृत हुई और फिर काम किया। इसके बाद से गौरेया ने आना शुरू कर दिया। गत वर्ष 80 से 90 गौरैया को उन्होंने गिना था। बरसात से पहले गौरैया ब्रीडिंग करती हैं। उनके अंडों और बच्चों को संरक्षित करने का प्रयास रहता है। वह दूसरों को भी गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रयास से तमाम लोग गौरैया संरक्षण के लिए आगे आए हैं।
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क्षेत्र में पेड़ों पर लगवाए घोंसले
सिंधौली के भट्टा व्यापारी राशिद अंसारी ने गौरैया बचाने के उद्देश्य से क्षेत्र में कई स्थानों पर पेड़ों पर घोंसले लगाए हैं। वह दूसरों को भी संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि गांवों में भी गौरैया कम होने लगी हैं। ऐसे में लोगों को संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता आसिफ मंसूरी के साथ स्कूली बच्चों को भी जागरूक कर रहे हैं।


किसान मित्र गौरैया पर अस्तित्व का संकट
किसानों की मित्र कहीं जाने वाली गौरैया के अस्तित्व पर संकट बन आया है। गौरैया के घोंसला बनाने के लिए उपयुक्त जगहें नहीं बची हैं। खेती में जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग से गौरैया के चूजों का भोजन खत्म हो गया है। बिना भोजन के चूजे दम तोड़ देते हैं। शहरों में वायु और ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है। 20 मार्च को प्रत्येक रेंज पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा घोंसलों का भी वितरण किया जाएगा।
-सचिन कुमार, डीएफओ

गौरैया बचाओ की मुहिम चलाई थी
शाहजहांपुर का ब्रिटिशकालीन गजेटियर जनपद को चार सौ प्रकार की चिड़ियों का घर बताता है। इन चिड़ियों में गौरैया की उपस्थिति विशेष प्रभावशाली थी। जनपद में अकूत जल संपदा, झीलें उनके किनारे उगने वाली अरवा-झरवा घास, जल धाराओं के सतत प्रवाह ने गौरैया को अनुकूल परिवेश दिया था। बदलते दौर में गौरैया के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लग गया है। शाहजहांपुर सीनियर सिटीजन ग्रुप ने गौरैया बचाओ मुहिम भी चलाई थी।
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-डॉ.विकास खुराना, इतिहासकार

सचिन कुमार, डीएफओ

सचिन कुमार, डीएफओ

सचिन कुमार, डीएफओ

सचिन कुमार, डीएफओ

सचिन कुमार, डीएफओ

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