शाहजहांपुर। अंत भला तो सब भला। एकतरफा जीत का दावा कर रही भाजपा को जीत के लिए अंत तक जूझना पड़ा। भले ही सपा के खाते में हार आई, लेकिन यह चुनाव पार्टी के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। लोकसभा चुनाव के इतिहास में सपा ने सर्वाधिक वोट हासिल किए हैं। जीत मिलने के बावजूद भाजपा के लिए यह प्रदर्शन खतरे की घंटी है। बसपा का वोटिंग प्रतिशत निराशाजनक रहा है।
2019 में भाजपा प्रत्याशी अरुण सागर ने 2,67,585 वोटों से जीत हासिल की थी। यह शाहजहांपुर लोकसभा के इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी। इस बार शुरुआत से भाजपाई ढाई लाख से ज्यादा वोटों से जीतने का दावा करते रहे थे। इसके बावजूद इस लोकसभा चुनाव में भाजपा का दबदबा नहीं दिखा।
2009 के बाद हर चुनाव में भाजपा का वोटिंग प्रतिशत बढ़ता रहा, मगर इस बार कम हो गया। इतना जरूर था कि हर राउंड में भाजपा आगे रही, लेकिन यह अंतर कभी इतना बड़ा भी नहीं हुआ कि समर्थक जीत को लेकर आश्वस्त हो सकें। दोपहर तक तो अंतर सात हजार वोटों के आसपास आ गया था। बाद में धीरे-धीरे कर बढ़त बनती गई और शाम को जीत का प्रमाण पत्र लेकर भाजपा प्रत्याशी लौट गए।
यह हालत तब हुई जब जिले में तीन मंत्री, चार विधायक, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, एक एमएलसी भाजपा से हैं। जीत के बावजूद पार्टी को अपने प्रदर्शन पर आत्ममंथन की जरूरत है।
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सपा लड़ी और सम्मानपूर्वक हारी
गत चुनाव में बसपा से गठबंधन के कारण सपा प्रत्याशी मैदान में नहीं था। 2009 में सपा से मिथिलेश कुमार जीते थे। उन्हें सर्वाधिक 2,57,033 वोट मिले थे। 2014 के चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के बाद सपा कोई बड़ा चुनाव नहीं जीत सकी है। इस बार भी सपा कांग्रेस से गठबंधन के बावजूद बहुत बेहतर स्थिति में शुरुआत से ही नहीं दिखी। एक महीने तक सपा के प्रत्याशी रहे राजेश कश्यप को अचानक हटाकर ज्योत्सना गौंड को मैदान में उतार दिया गया था। पार्टी के अंदरखाने भी कलह मची रही। ज्योत्सना के आने के बाद पार्टी के बड़े नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ाने आगे आए। पहला चुनाव लड़ रहीं ज्योत्सना के लिए शाहजहांपुर की राजनीति भी नई थी। उन्होंने खुद को ढालने का प्रयास किया, मगर समय कम मिला। इसके बावजूद चार लाख से अधिक वोट हासिल करने में कामयाब रहीं। सपा का प्रदर्शन कार्यकर्ताओं में जोश भरेगा।
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निराशाजनक रहा बसपा का प्रदर्शन
बसपा के लिए लोकसभा चुनाव काफी निराशाजनक रहा। पार्टी 60 हजार वोटों के आसपास ही सिमट गई। गत लोकसभा चुनाव में पार्टी को 4,20,572 वोट मिले थे। 2019, 2014 और 2009 में बसपा दूसरे स्थान पर आई थी। इस बार उसे तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। पार्टी के चुनाव प्रचार में गंभीरता नहीं नजर आई। यहां तक कि बसपा की ओर से एक भी जनसभा का आयोजन तक नहीं कराया गया। ऐसे में परिणाम अपेक्षाकृत ही रहा।