स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ली जानकारी
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इस तरह की हो रही परेशानी
श्रीपाल ने बताया कि उन लोगों के शरीर में पहले दाने निकलते हैं। बाद में फफोले पड़ जाते हैं। इसके बाद शरीर में सूजन आने लगती है। हाथ, पैर चलना मुश्किल हो जाते हैं। कमजोरी लगने लगती है। नसों में खिंचाव महसूस होता है। आंखों से पानी आने लगता है। शरीर सूख गया है। खड़े रहने तक में दिक्कत हो रही है। श्रीपाल के अनुसार उनकी बहन शिवरानी की मौत इसी बीमारी से हुई है। भाई अवधेश को शाहजहांपुर के निजी अस्पताल से लखनऊ रेफर किया गया था। स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में आने के बाद अवधेश को घर लाया गया है। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल ले जाया जाएगा। उनकी हालत गंभीर है।
छह महीने से चल रहा इलाज, आर्थिक स्थिति बिगड़ी
सियाराम के पास ढाई बीघा जमीन है। बड़ा परिवार होने के कारण परिवार के सदस्य मेहनत, मजदूरी कर गुजर करते हैं। श्रीपाल चाट का ठेला लगाते हैं। श्रीपाल के अनुसार छह महीने से इलाज चल रहे होने के कारण परिवार आर्थिक संकट में घिर गया है। परिवार के लोग पैसे-पैसे को मोहताज हैं और अब इलाज कराने में असमर्थ हैं। श्रीपाल ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनकी बात का संज्ञान लेकर इलाज कराएं।
सीएमओ डॉ. आरके गौतम ने बताया कि बड़ागांव के परिवार के जितने भी सदस्य बीमारी से ग्रसित हैं, सभी को पुवायां के सीएचसी अधीक्षक बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल लाएंगे। सीएमएस को निर्देशित किया है कि सभी की समुचित जांच और उपचार कराया जाएगा। त्वचा रोग से मौत नहीं लग रही है। जांच में ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।