शाहजहांपुर। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शासन के निर्देश पर प्रशासन गांवों को खुले में शौच मुक्त कराकर ओडीएफ श्रेणी मेें लाने के लिए वहां शौचालय बनवाने में जुटा है, लेकिन गंदगी के निस्तारण पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। कहने को जिले के 147 गांव ओडीएफ घोषित हो चुके हैं, लेकिन तमाम ओडीएफ गांवों में गंदगी के ढेर अंगद के पांव जैसे जगह-जगह जमे हुए हैं। ड्रेनेज सिस्टम फेल होने से चोक हुईं नालियों का गंदा पानी गलियारों में भरने से आवागमन की समस्या पैदा करने के साथ बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। खास यह है कि ओडीएफ गांवों में तमाम शौचालय अधूरे पड़े हैं, जबकि कागजों में उन्हें पूरा बना दर्शाया जा चुका है।
पुवायां। गांव जुझारपुर ओडीएफ घोषित हो चुका है, लेकिन सोमवार को गांव जाने पर अजीज खां के शौचालय में ईंधन भरा मिला। शौचालय में लगा दरवाजा भी टूटा पड़ा था। इससे साफ है कि शौचालय का काफी समय से इस्तेमाल नहीं किया गया है। गांव के लोगों ने बताया कि गांव में सफाईकर्मी विकास कुमार के नहीं आने के कारण गंदगी है। गांव में एक नाली को कुछ लोगों ने आगे से बंद कर रखा है, जिस कारण नाली में गंदगी और पानी भर जाता है। जिन घरों के आगे नाली बनी है, उन घरों के लोग खुद ही नाली की सफाई करते हैं। गांव में कई जगहों पर कूड़ा लगा हुआ है। कुल मिलाकर गांव ओडीएफ घोषित होने के बाद भी सफाई व्यवस्था बेहद खराब है।
खुटार। ओडीएफ घोषित इटौआ गांव के सभी 55 शौचालय कागजों में पूरे दिखाए जा चुके हैं, जबकि गांव में कई शौचालय अधूरे पड़े हैं। गांव में कई जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। कुछ लोग गांव के सटे हुए रास्तों के पास ही घूरा आदि भी डाल रहे हें, जिससे संक्रामक रोग फैलने की आशंका है। गांव में कई रास्तों पर जलभराव भी है। गांव के लोगों ने बताया कि सफाईकर्मी गांव आकर मुख्य रास्तों पर झाडू़ लगाने के बाद खिसक जाता है। शिकायत करने के बाद भी उसका रवैया नहीं बदलता है। एडीओ पंचायत सत्यप्रकाश बाजपेयी के अनुसार गांव में सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।