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टीका लगाकर बहनों ने की दीर्घायु की कामना

Fri, 13 Nov 2015 10:25 PM IST
शाहजहांपुर।
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शुक्रवार को जिले में भइया दूज हर्षोल्लास से मनाई गई। बहनों ने भाइयों को रोली-तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने बहनों को नगद दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया।
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भइया दूज पर रंग-बिरंगी पोशाकों में सजीधजी बहनों ने आंगन में चौक पूर कर भाइयों को रोली तिलक किया और मिष्ठान खिलाकर उनके दीर्घायु की कामना की। दूर-दराज रहने वाली बहनों ने भाइयों के घर पहुंचकर त्योहार मनाया। हालांकि यात्रा में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन पर्व की महत्ता और भाइयों की खुशी के आगे उन्होंने किसी भी परेशानी की परवाह नहीं की और घर पहुंचकर परंपरा का निर्वहन किया। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली बहनें बसों और ट्रेनों में भारी भीड़ में परेशानी उठाते हुए भाइयों के घर पहुंचीं। वहीं भाइयों ने भी इसी तरह की परेशानी उठाकर बहनों के घर तक का रास्ता तय किया और भइया दूज का टीका कराया।
टीका के बाद भाइयों ने नगद दक्षिणा और उपहार देकर बहनों को खुश किया। बच्चों में त्योहार का खासा उल्लास रहा। शहर में रिक्शों की कमी से भी बहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बड़ी संख्या में लोग कारों और मोटरसाइकिलों से भी टीका कराने के लिए घरों में पहुंच रहे थे। उधर, मिठाई की दुकानों पर पूरे दिन जबरदस्त भीड़ जुटी रही। नामी-गिरामी दुकानों पर तो दोपहर होते ही मिठाई का स्टाक खत्म हो चुका था, लेकिन सामान्य दुकानों पर पूरे दिन जबरदस्त भीड़ रही।
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उधर, मीरानपुर कटरा, भावलखेड़ा, सिंधौली, कांट, तिलहर, पुवायां, मुडिय़ा पवार, मदनापुर, परौर, कलान, मिर्जापुर, निगोही, रोजा आदि क्षेत्रों में भाई बहन के अटूट प्यार का त्योहार भइया दूज परंपरागत ढंग से मनाया गया ।
इस मौके पर बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना की। वहीं भाइयों ने उन्हें उपहार देकर उनकी रक्षा का वचन दिया। इस दौरान मिठाई एवं फलों की दुकानों पर भारी भीड़ रही। सरकारी बसों में भारी भीड़ के चलते प्राइवेट वाहन चालकों ने मनमाना किराया वसूलकर खूब जेबें भरीं।
जिला कारागार में भी उमड़ीं बहनें
जिला कारागार में बंदी भाइयों को भइया दूज का टीका करने के लिए सुबह तड़के से ही बहनें पहुंचने लगीं थीं। हालांकि इस बार उन्हें जेल प्रशासन की ओर से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई थी, जिस कारण दूर-दूर से परेशानी उठाकर आईं बहनों को यहां भी परेशानी का ही सामना करना पड़ा। कुछ महिलाओं ने बताया कि जेेल प्रशासन ने संवेदनहीनता का परिचय देते हुए कोई रियायत नहीं की, जबकि इससे पहले ऐसा कठोर व्यवहार कभी नहीं किया गया। कारागार के बाहर काफी संख्या में बहनें एकत्र थीं। भइया दूज का तिलक करने के लिए उन्हें घंटों इंतजार भी करना पड़ा।
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