कांट ब्लाक के जूनियर स्कूल मोहनपुर के प्रधानाध्यापक श्रीराम को नि:शुल्क पुस्तकें बेचने के आरोप में बीएसए ने निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित करके जांच आख्या बीएसए को देने के निर्देश दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएसए ने कमेटी के साथ खुद जाकर मामले की जानकारी ली।
पुस्तकें पकड़े जाने के मामले में खंड शिक्षा अधिकारी (कांट) शुचि गुप्ता ने प्रधानाध्यापक को निलंबित करने की संस्तुति बृहस्पतिवार को की थी। शुक्रवार को पहुंचे बीएसए राकेश कुमार ने श्रीराम को निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की तह तक जाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के वित्त एवं लेखाधिकारी पीपी सिंह, खुटार के खंड शिक्षा अधिकारी राजेश चतुर्वेदी और नगर शिक्षा अधिकारी मुन्नालाल त्रिवेदी की टीम बना दी है। शुक्रवार को कांट पहुंची टीम ने मामले की जांच की। इसके बाद बीएसए ने भी मौके पर पहुंचकर मामले की पूरी जानकारी की।
एनपीआरसी का था गोदाम
शाहजहांपुर। जूनियर स्कूल मोहनपुर के प्रधानाध्यापक श्रीराम ने इतनी संख्या में किताबें बेची थीं। वहां पर एनपीआरसी का किताब रखने का गोदाम था। इसलिए क्षेत्र में बचने वाली किताबों का वहां पर भंडारण किया जाता था। इसी वजह से वहां पर हजारों की संख्या में नि:शुल्क वितरण वाली पुस्तकें रखी हुईं।
15 बोरियों में रखी थीं 3048 पुस्तकें
कांट ब्लाक के मोहनपुर गांव में पकड़ी गईं 15 बोरियों में 3048 पुस्तकें रखी हुई थीं। पकड़ी गई बोरियों को बीईओ शुचि गुप्ता की निगरानी में रखवा दिया गया था। उस गोदाम को बीईओ मुख्यालय ने सीज कर दिया। शुक्रवार को कांट पहुंचे बीईओ शुक्ला ने गोदाम का ताला खुलवाकर पुस्तकों की गिनती जांच टीम के सामने करवाई गई। बीएसए के मुताबिक कक्षा एक से लेकर आठ तक की 3048 पुस्तकें निकाली गईं।
कांट बीईओ बनाए गए मुन्नालाल
शाहजहांपुर। कांट क्षेत्र में नि:शुल्क पुस्तकों को बेचने के मामले में कांट की खंड शिक्षा अधिकारी पर शुचि गुप्ता पर आखिरकार गाज गिर ही गई। गुप्ता को वहां से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर नगर शिक्षा अधिकारी रहे मुन्नालाल त्रिवेदी को कांट का खंड शिक्षा अधिकारी बनाया गया। वहीं शुचि गुप्ता को मुन्नालाल की जगह नगर शिक्षा अधिकारी बनाया गया है।
इस संबंध में बीएसए राकेश कुमार का कहना है कि मोहनपुर जूनियर स्कूल के प्रधानाध्यापक ने इतनी संख्या में पुस्तकों को बेच दिया। इसकी जानकारी भी शुचि गुप्ता का जिला स्तर से दी गई। इससे गुप्ता का काम वहां पर संतोषजनक नजर नहीं आ रहा था। इसी वजह से गुप्ता को वहां से हटा दिया गया।
शुचि गुप्ता को रखा गया है जांच से दूर
मामले की जांच करने के लिए गई बीएसए द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने बीईओ शुचि गुप्ता को जांच से दूर रखा। वहां पर इस संबंध में हुई जानकारी के बारे में उन्हें कुछ खास नहीं बताया गया। गुप्ता ने मोबाइल फोन पर हुई बातचीत में इस बात को स्वीकार करते हुए बताया कि टीम ने जांच के दौरान उनसे कोई बात शेयर नहीं की।