मंदिर में देवी प्रतिमा
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महिलाएं भी अपने लिए उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करती थीं। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को पुलिस चौकी बनाई जाती थी। लेकिन अब अधिकांश वस्तुएं आसपास के कस्बों में मिलने के कारण मेले का स्वरूप बदल गया है और औपचारिकता मात्र रह गया है। जिससे मेला अपनी भव्यता खोने लगा है।