शाहजहांपुर। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र को श्रद्धालु योगीराज का जन्मोत्सव मनाते हैं। इस बार 15 अगस्त शुक्रवार की रात्रि को 12:58 के बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी, जो 16 अगस्त शनिवार को रात्रि 10:30 तक रहेगी। ऐसे में रोहिणी नक्षत्र के अभाव के साथ उदयकालिक तिथि में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
श्री रुद्र बाला जी धाम के पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ला ने बताया कि भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। कई बार ऐसा होता है कि यह दोनों संयोग एक साथ नहीं बन पाते। इस बार उदया तिथि अष्टमी में रोहिणी नक्षत्र का संयोग 16 अगस्त शनिवार को नहीं मिल रहा है।
अर्द्ध रात्रि तक अष्टमी तिथि भी नहीं रहेगी, फिर भी औदायिक तिथि को मानते हुए सभी जनसमुदाय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 16 अगस्त शनिवार को मनाएंगे। उन्होंने बताया कि इस बार जन्माष्टमी का पावन पर्व 16 अगस्त को गृहस्थों के साथ मठ-मंदिरों में भी मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के दिन बुधादित्य, वृद्धि और ध्रुव, ये तीन अनोखे योग बनेंगे।
नए काम की शुरुआत के लिए ये बहुत ही शुभ योग हैं। महावीर पंचांग के अनुसार, इस दिन कर्क राशि में बुधादित्य योग रहेगा। दोपहर 1:43 बजे चंद्र देव अपनी उच्च राशि में प्रवेश करेंगे। इसके अलावा, सुबह 10:11 बजे तक वृद्धि योग रहेगा, जिसके बाद ध्रुव योग आरंभ होगा। इस योग में सूर्य देव की पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है।
व्रत का संकल्प लेकर झांकी सजाएं
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प करें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित कर झांकी सजाएं। इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए।
मनोकामना होती पूर्ण
पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ला ने बताया कि मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। ऐसी मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से व्यक्ति को बाल कृष्ण जैसी संतान प्राप्त होती है। जन्माष्टमी के दिन व्रत और पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है। लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है।