विधानसभा चुनाव में मतदान के बाद कार्यालयों, चाय-पान की दुकानों, चौपालों, नुक्कड़ों पर प्रत्याशियों की हार-जीत को लेकर सियासी बहस छिड़ी हुई है। हर कोई आंकड़ों में अपने प्रत्याशी को जिताने में लगा है। इस बार मतदाताओं के मन की टोह लेना आसान नहीं रहा। खासकर गांवों में रहने वाले मतदाताओं के रुझान का पता कर पाना बेहद मुश्किल रहा। चुनाव के बारे में पूछने पर मतदाता चुप्पी साध जाता है। ज्यादा कुरेदने और किसकी जीत हो सकती है, के बारे में पूछने पर वह नपा तुला जबाव देता है ‘हम का बतामैं, देखति रहऊ, गिनती कि बाद सबु सामने आइ जइहइ।’ कुछ पढ़े लिखे मतदाताओं का कहना है कि कोई भी जीते गांवों की स्थित में कोई परिवर्तन आने वाला नहीं है। आजादी के बाद से गांवों की दशा में खास परिवर्तन नहीं आया है। कई गांव अब भी बिजली, पानी, सफाई, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं को तरस रहे हैं। नगर और देहात क्षेत्र में चाय, मिष्ठान, पान की दुकानों पर हार जीत को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। पार्टियों के समर्थक तमाम तर्क देकर अपने प्रत्याशी की जीत पक्की बता रहे हैं।