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Shahjahanpur News: शिवजी का शृंगार, फूलों और बिजली की झालरों से सज गए शिवालय

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चौक ​स्थित मंदिर में शिवलिंग का शृंगार करती महिला। स्रोत: जागरुक पाठक
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शाहजहांपुर। महाशिवरात्रि को लेकर जिले के सभी शिवालयों में तैयारी पूरी हो गई हैं। मंदिरों की साफ-सफाई सहित रंग रोगन का कार्य पूरा कर लिया गया है। पूर्वसंध्या पर शिव मंदिरों को फूलों व बिजली की झालरों से सजा दिया गया। शिवजी का शृंगार किया गया।
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रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा विश्वनाथ मंदिर, बाबा वनखंडीनाथ मंदिर, चौकसीनाथ मंदिर, सिंधौली के पैना बुजुर्ग स्थित त्रिलोकीनाथ मंदिर, हनुमतधाम, जेल रोड स्थित शिव मंदिर, हयातपुरा स्थित शिव मंदिर, सुभाषनगर काॅलोनी स्थित शिव मंदिर, पटना देवकली के शिव मंदिर, बंडा के सुनासीरनाथ मंदिर, मदनापुर के फिरोजपुर स्थित शिव मंदिर, रोजा के तुरंतेश्वरनाथ शिव मंदिर आदि में पूजा अर्चना की जाएगी।
हजारों की संख्या में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ेगी। इसे लेकर मंदिर कमेटियों ने भी तैयारी पूरी कर लीं हैं। शिव विवाह उत्सव भी मनाया जाएगा। शिवभक्तों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इसके मद्देनजर सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई है। शनिवार रात्रि से ही सुरक्षाकर्मी अपनी ड्यूटी पर पहुंच जाएंगे।
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दिव्य और दुर्लभ संयोग के साथ पड़ रही महाशिवरात्रि
श्री रुद्र बाला जी धाम के पंडित कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि महाशिवरात्रि एक दिव्य और दुर्लभ संयोग के साथ पड़ रही है। कालखंड में शनि और सूर्य अर्थात पिता और पुत्र उस दिन संयुक्त मिल रहे हैं। इसके अलावा, शुक्र भी अपनी भाव में उच्च राशि में स्थित रहेंगे। इसके अलावा प्रदोषकाल भी है। इस वजह से महाशिवरात्रि का महापर्व 15 फरवरी को 3.59 बजे प्रारंभ होगा, जो 16 फरवरी को सायं 4.45 तक रहेगा। महाशिवरात्रि के दिन सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजकर 48 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। इसके बाद उत्तराषाढा नक्षत्र शाम 7: 26 तक रहने वाला है। इसके बाद श्रवण नक्षत्र का शुभारंभ होगा, जो अगले दिन 16 फरवरी को रात्रि 8:40 तक बना रहेगा। महाशिवरात्रि पर व्यतीपात योग पूरे दिन बना रहेगा। इस दिन निशीथ काल रात 11 बजकर 52 मिनट से लेकर रात 12:42 तक रहेगा। हालांकि, दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12:57 तक अभिजीत मुहूर्त रहने वाला है। अमृतकाल दोपहर 12:59 से 14:41 तक रहेगा।

ऐसे करें पूजा
पंडित कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा के लिए पूर्व या उत्तर दिशाओं की ओर मुंह करके बैठें। घर के देवालय या किसी शिवालय में जाकर गंगा या पवित्र जल से जलधारा अर्पित करें। दूध, जल, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र, धतूरे से भगवान शिव का अभिषेक करें। भगवान शिव के साथ शिव परिवार का फूल, गुड़, जनेऊ, चंदन, रोली, कपूर से पूजन करें। शिव स्रोत और शिव चालीसा का पाठ करें। व्रत रखें और सच्चे दिल से अपनी मनोकामना के लिए उपासना करें।

चौक स्थित मंदिर में शिवलिंग का शृंगार करती महिला। स्रोत: जागरुक पाठक

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