शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर बृहस्पतिवार को पैदल मार्च निकाला गया। कलक्ट्रेट पहुंचकर सात सूत्री मांग पत्र सिटी मजिस्ट्रेट प्रवेंद्र कुमार को सौंपा।
बृहस्पतिवार को गांधी भवन में जिले के समस्त ब्लॉकों से शिक्षक-शिक्षामित्र जुटे। यहां पर उन्होंने पिछले वर्षों में काल के गाल में समा चुके शिक्षामित्रों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। जिलाध्यक्ष डाॅ. रत्नाकर दीक्षित ने कहा कि शिक्षामित्र पिछले 23 सालों से परिषदीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार सिर्फ दस हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दे रही है, इतने से गुजारा करना मुश्किल है।
सात वर्षों में महंगाई बढ़ी, लेकिन शिक्षामित्र के मानदेय नहीं बढ़ाया गया। ऐसे में अवसाद ग्रस्त होकर प्रदेश के लगभग 8000 शिक्षामित्र असमय काल के गाल में समा चुके हैं। बोले कि सरकार अगर चाहें तो अन्य प्रदेशों की तरह शिक्षामित्रों को स्थायी कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। वर्ष 2018 में गठित की गई कमेटी, इसके बाद 14 नवंबर 2023 को गठित की गई कमेटी के निर्णय का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पटल पर पहुंच चुका है, फिर भी कार्रवाई लंबित है।
उनकी मांग है कि शिक्षामित्रों को नई शिक्षा नीति में शामिल कर स्थायीकरण किया जाए। स्थायीकरण होने तक मानदेय/वेतन अन्य राज्यों की तरह दिया जाए। मूल विद्यालय से वंचित शिक्षामित्रों को दोबारा मूल विद्यालय जाने की छूट दी जाए। महिला शिक्षामित्रों को ससुराल के पड़ोस के विद्यालय में स्थानांतरित किया जाए। मृत शिक्षामित्रों के आश्रितों को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
मार्च व ज्ञापन में जूनियर हाईस्कूल के जिलाध्यक्ष मगरे लाल, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिकांत पांडेय, एसटीएससी संघ के जिलाध्यक्ष अजय वर्मा राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संगठन मंत्री अंकुर त्रिपाठी, यूटा के जिलाध्यक्ष विनीत गंगवार अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष रवि वर्मा, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्यामलाल यादव, जिला महामंत्री रामपूत पाल, जिला प्रभारी वेद वर्मा, जिला उपाध्यक्ष जितेंद्र दीक्षित आदि शामिल रहे।