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25 मार्च को मनाई जाएगी शीतला अष्टमी

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डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी के रूप मे मनाया जाता है। यह तिथि इस बार 25 मार्च को पड़ रही है। शीतला अष्टमी पर व्रत करने का खासा महत्व है। मान्यता है कि शीतला माता की कृपा से खसरा, चेचक जैसे आदि रोग दूर होते हैं।
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श्री रुद्र बालाजी धाम के पुजारी डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि शीतला माता की पूजा की जाती है। इस दिन मां शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। मां को भोग लगाने के बाद श्रद्धालुु भी बासी भोजन ही खाते हैं। इस दिन घर पर चूल्हा नहीं जलता है, ठंडा खाना ही खाया जाता है।
सप्तमी की रात में ही भोग के लिए हलवा और पूड़ी तैयार कर लिया जाता है। अष्टमी के दिन ये प्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता है। बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार मां शीतला को चेचक, खसरा जैसे रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है। बच्चों को रोग मुक्त बनाने के लिए ये व्रत और पूजा उनकी मां करती हैं।
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यह है शुभ मुहूर्त
24 मार्च बृहस्पतिवार रात एक बजे से 25 मार्च शुक्रवार रात 10:35 बजे अष्टमी तिथि रहेगी। यानी शुक्रवार को पूरे दिन अष्टमी है।
मां शीतला के व्रत का विधान
यह दिन व्रत रखने वाले को सुबह स्वच्छ और शीतल जल से स्नान करना चाहिए। इसके बाद मंत्र - मम गेहे शीतलारोगजनितोपद्रव प्रशमन...पूर्वकायुरारोग्यैश्वर्याभिवृद्धिये शीतलाष्टमी व्रत अहं करिष्ये पढ़कर संकल्प लें। ततपश्चात विधि-विधान से पुष्प-गंध आदि से मां शीतला की पूजा करें। पूजा करने के बाद एक दिन पहले बनाए हुए बासी खाने का भोग लगा। बासी मेवे, मिठाई, पुआ, पूरी आदि का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद शीतला स्तोत्र का पाठ करें। यदि शीतला स्तोत्र उपलब्ध न हो तो शीतला अष्टमी की कथा सुनें। रात में मां का जगराता करें और दीपमाला जलाएं।
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