कई अधिकारी मारे गए थे
चर्च तथा शहर में अनेक यूरोपीय अधिकारी तथा नागरिक मारे गए। इनमें परेड ग्राउंड में कैप्टन जेम्स, डॉ. बॉउलिंग, पादरी मैक्यूलियन, कलक्ट्रेट के क्लर्क स्मिथ, लिमिस्टियर आदि थे। शेष लोगों को सिख सैनिकों की मदद से बाहर निकाला गया। चर्च में मारे गए जिला मजिस्ट्रेट एम. रिक्रेट तथा अन्य यूरोपीय लोगों के शवों अगले दिन चर्च में पूरब तथा उत्तरी दिशा में सामूहिक रूप से तहसीलदार अमजद अली ने दफना दिया था। कब्रें अब भी वहां मौजूद हैं।
स्थापित हुआ रुहेला शासन
सैनिकों ने शहर में रुहेला सरकार की स्थापना करवाई तथा शाम को वे दिल्ली की ओर चले गए। एक जून को शाहजहांपुर स्वतंत्र घोषित कर दिया गया। शाहजहांपुर में क्रांति सबसे लंबे समय तक चलती रही। बरेली के खान बहादुर खान की सरपरस्ती में रुहेला सरकार का गठन हुआ। गुलाम कादिर खान जिले के नाजिम बने। अब्दुल रऊफ सेना के कमांडर, चार रेजिमेंट पैदल, नौ घुड़सवार टुकड़ियां तैयार की गईं। हसमत अली शस्त्रागार प्रभारी बने।
शाहजहांपुर में लंबे समय तक धधकी क्रांति की ज्वाला
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष और इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने बताया कि दिल्ली, अवध, झांसी जैसे क्रांति के केंद्रों के पतन के बाद प्रख्यात मौलवी अहमद उल्लाह शाह, नाना साहिब, मुगल बादशाह के भतीजे फिरोजशाह, जनरल बख्त खान शाहजहांपुर आकर क्रांति का राष्ट्रीय नेतृत्व कर रहे थे। इसी क्रांति के मध्य शाहजहांपुर जेल पर नौ दिन तक गोले दागे गए थे। क्रांति के बाद जहां शहर का किला ध्वस्त किया गया, जली कोठी जलाई गई।। जवाहर राय सहित अनेक सैनिकों को लखनऊ में फांसी की सजा दी गई। शाहजहांपुर में सबसे लंबे समय तक क्रांति की ज्वाला धधकती रही।