सेशन जज प्रथम उमेश कुमार शर्मा ने फौजदारी के मामले में अपील को खारिज करते हुए तीन लोगों की सजा बरकरार रखी है। एसीजेएम तृतीय कोर्ट ने इन लोगों को दोषी ठहराया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मिर्जापुर थाना क्षेत्र के गांव बानगांव गौंटिया निवासी बाबूराम ने 21 मार्च 2000 को रिपोर्ट लिखाई थी। इसके अनुसार वह अपने घर के बाहर खड़े थे तभी गांव का नेकराम, उसका भाई गिरीश और धर्मपाल तथा उसका भाई श्याम बाबू आए और गालियां देने लगे। मना करने पर लाठी डंडों से बाबूराम को मारा-पीटा। चारों लोगों के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में एसीजेएम कोर्ट ने सभी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी।
इस आदेश के विरुद्ध इन लोगों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। शनिवार को सेशन जज प्रथम ने सरकारी वकील वंशीलाल के तर्कों से सहमत होकर एसीजेएम कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए नेकराम, धरमपाल, श्यामबाबू को हमला कर घायल करने का दोषी मानकर दो-दो साल कारावास और पांच-पांच सौ रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई। आरोपी गिरीश की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।