किसानों को फसलों के नुकसान का मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर भाजपा मछुआरा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक मनोज कश्यप के नेतृत्व में तहसील परिसर में शुक्रवार धरना प्रदर्शन और एक दिवसीय भूख हड़ताल होने थी। मगर एसडीएम वंदना त्रिवेदी की सख्ती के चलते भाजपाइयों को अपना कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। इसे लेकर एसडीएम तथा भाजपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन देकर कार्यक्रम स्थगित कर दिया।
भाजपा नेता मनोज कश्यप का आरोप था कि प्रशासन द्वारा पहले किसानों को वितरित की गई मुआवजा राशि में धांधली की गई थी। इससे काफी किसान मुआवजा पाने से वंचित रह गए। साथ ही मौजूदा समय प्रशासन के पास किसानों को वितरण करने के लिए तीन करोड़ की धनराशि मौजूद है, लेकिन उसे मुआवजा वितरित नहीं किया जा रहा है। इन्हीं मामलों को लेकर मनोज ने शुक्रवार को एक दिवसीय भूख हड़ताल तथा कार्यकर्ताओं के साथ धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया था।
शुक्रवार सुबह कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ता तहसील पहुंचे। कुछ ही देर बाद एसडीएम भी आ पहुंचीं और उन्होंने कार्यकर्ताओं से माइक दरी समेटने के आदेश देने के साथ ही बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स बुलवा लिया। इसके बाद मनोज कश्यप, कृष्ण कुमार मंगलम, गौरव राघव समेत कई अन्य पार्टी कार्यकर्ता वहां पहुंच गये और एसडीएम से बहस शुरू हो गई। मनोज का कहना था कि उन्होंने इसकी सूचना प्रशासन को दी, लेकिन एसडीएम ने कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। साथ ही एसडीएम ने कहा कि धारा 144 लागू है और किसी भी कीमत पर आंदोलन करने की छूट नहीं दी जाएगी। काफी देर तक हुई नोकझोंक के बाद कार्यकर्ता आंदोलन स्थगित करके चले गए। इसके कुछ देर बाद ज्ञापन के जरिए समान रूप से किसानों को मुआवजा का वितरण कराए जाने की मांग की।