शाहजहांपुर। स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों की नाक के नीचे घोटाले दर घोटाले हो रहे हैं। इसके बावजूद कोई भ्रष्टाचार तब ही खुलता है जब प्रशासन जांच कराता है। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र घोटाले में भी शिकायत के बाद जब प्रशासन ने जांच कराई तब सच्चाई सामने आई। माना जा रहा है कि पूरी जांच कराने पर कई अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं। साथ ही कर्मचारियों-अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
हाल में ही चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर लाखों रुपये फर्जी तरीके से निकालने पर डीएम ने प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग में उपकरणों और अन्य सामग्रियों की खरीद में सौ करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया था। प्रशासन की जांच में सीएमओ समेत अन्य अधिकारियों के नाम आए थे। घोटालों के सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने निगरानी की जरूरत नहीं समझी।
यही वजह है कि लगातार भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि फिलहाल इन 14 लोगों के नाम सामने आए हैं लेकिन अगर जांच कराई जाएगी तो तमाम मामले सामने आ सकते हैं।
ऐसे दिया गया भ्रष्टाचार को अंजाम
माना जा रहा है कि लाभ लेने का प्रयास करने वाले ग्रामीण किसी दलाल के जरिये स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के संपर्क में आए थे। लालच में दिव्यांग न होने के बावजूद उन्होंने दिव्यांगता का प्रमाणपत्र बनवा लिया। प्रमाणपत्र का लाभ लेने के लिए 40 या इससे ज्यादा प्रतिशत दिव्यांगता होनी चाहिए। मेडिकल बोर्ड यह जांच करता है कि व्यक्ति की दिव्यांगता कितने प्रतिशत है। इसके बाद प्रमाण पत्र बनाया जाता है। मेडिकल बोर्ड के सामने दिव्यांगता की जांच में हकीकत सामने आ जाती है। इस वजह से भ्रष्टाचार को अंजाम देने वालों ने खेल करते हुए लाभार्थियों को बोर्ड के सामने पेश ही नहीं किया। फर्जी तरीके से उनके प्रमाणपत्र बना दिए गए।
दिव्यांग प्रमाणपत्र से ये मिल सकते हैं लाभ
जिले में 24 हजार दिव्यांगाें को एक हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाती है। दिव्यांग प्रमाणपत्र के बल पर मासिक पेंशन के साथ ही सहायक उपकरण, आवास में वरीयता, बस में फ्री यात्रा, नौकरियों में लाभ मिलता है।
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इनके खिलाफ दर्ज होगी प्राथमिकी
शिवम वाजपेयी, सूर्य प्रताप सिंह, विजयवीर, शिवप्रताप सिंह, बलवीर, रिंकी, राजाराम, मोबीन, विक्रांत कुमार, प्यारे मियां खां, अच्छू मियां, आदेश कुमार, रुद्रप्रताप सिंह, अनिल। इनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र निरस्त करते हुए इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जांच में सभी दोषियों के नाम सामने आएंगे। संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम