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स्कूलों में खोखली हो रहीं देववाणी की जड़ें

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शाहजहांपुर। देववाणी कही जाने वाली संस्कृत भाषा से बच्चों और युवाओं का मोहभंग हो चुका है। इसी वजह से जिले के संस्कृत विद्यालय बंदी के कगार पर पहुंच चुके हैं। संस्कृत के 11 माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या 300 भी नहीं है। किसी विद्यालय में दो बच्चे हैं तो किसी में चार। एक विद्यालय में सर्वाधिक 51 बच्चे अध्ययनरत हैं। बदहाली का आलम यह है कि छह सहायता प्राप्त माध्यमिक कॉलेजों में से सिर्फ एक विद्यालय में ही दो शिक्षक हैं। बाकी किसी विद्यालय में स्टाफ ही नहीं है।
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श्री परशुराम संस्कृत महाविद्यालय जलालाबाद और एमएलडी संस्कृत महाविद्यालय खुदागंज में भी एक-एक शिक्षक है। जिले में संस्कृत के कुल छह महाविद्यालय हैं, जिनमें चार अशासकीय सहायता प्राप्त हैं और दो वित्तविहीन हैं। इसी तरह इंटर (उत्तर मध्यमा) तक के आठ कॉलेज हैं, जिनमें पांच सहायता प्राप्त और तीन वित्तविहीन, तीन हाईस्कूल (पूर्व मध्यमा) के हैं, जिनमें एक सहायता प्राप्त और दो वित्तविहीन स्कूल हैं। यानि 11 विद्यालय माध्यमिक स्तर के हैं। सेठ गयादीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालय गुंदौरा दाउदपुर कलान में सिर्फ दो शिक्षक हैं, बाकी सभी विद्यालय शिक्षकविहीन हैं। इन स्कूलों में कार्यरत सभी शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
छात्रों को पढ़ाने के लिए शासन के निर्देश पर जो वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, उसमें पांच शिक्षकों को दूसरे कॉलेजों से समायोजित किया गया है और इतने ही रिटायर्ड शिक्षकों को 15 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर रखा गया है। डीआईओएस कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को अधियाचन भेजे जा चुके हैं।
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ये है छात्र संख्या का हाल
संस्कृत विद्यालयों में छात्र संख्या भी बहुत कम हो चुकी है। शहर में स्थित शिवशंकर संस्कृत माध्यमिक विद्यालय दलेलगंज में एक बालक और एक बालिका है। अनंत विज्ञान संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में भी एक बालक और एक बालिका पंजीकृत हैं। इसके अलावा सावित्री देवी धार्मिक संस्कृत माध्यमिक विद्यालय तिलहर में चार, महर्षि दयानंद संस्कृत माध्यमिक विद्यालय रफियाबाद कलान में 14, गुरुकुल संस्कृत माध्यमिक विद्यालय रुद्रपुर तिलहर में 17 बच्चे पंजीकृत हैं। ये सभी विद्यालय अशासकीय सहायता प्राप्त हैं। इनके अलावा अन्य विद्यालयों में भी छात्र संख्या संतोषजनक नहीं कही जा सकती।
जांच के लिए टास्क फोर्स गठित
संस्कृत विद्यालयों में छात्र संख्या और इसके आधार पर नियुक्तियों की जांच के लिए टास्क फोर्स गठित की जा चुकी है। तहसीलवार गठित तीन सदस्यीय समिति में पीडब्ल्यूडी विभाग का एक इंजीनियर और दो सदस्य शिक्षा विभाग के शामिल किए गए हैं। इंजीनियर विद्यालय भवन की जांच करेगा, जबकि विभागीय सदस्य छात्र और शिक्षक संख्या संबंधी जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेंगे।
संस्कृत को बनाएं रोजगारपरक
संस्कृत विद्यालयों के प्रति सरकार को ध्यान देना चाहिए। पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत है, साथ ही शिक्षकों की नियुक्तियां की जानी चाहिए। संस्कृत की दशा सुधारने के लिए इसे रोजगारपरक भी बनाने की जरूरत है। - डॉ. हरिनाथ झा, प्राचार्य श्री ब्रह्मचर्य संस्कृत महाविद्यालय
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