शाहजहांपुर। इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद छात्र-छात्रा शास्त्री की पढ़ाई का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके लिए अब इंटरमीडिएट में संस्कृत विषय का होना जरूरी नहीं है। इसी तरह से बीए में संस्कृत विषय न होने पर भी आचार्य की पढ़ाई की जा सकेगी। शास्त्री जहां बीए, वहीं आचार्य की डिग्री एमए समकक्ष होती है।
जिले में छह संस्कृत महाविद्यालय हैं जो अलग-अलग ब्लॉकों में स्थित हैं। एडेड में तिलहर का गुरुकुल महाविद्यालय रुद्रपुर, खुदागंज में एमएलडी आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, जलालाबाद में श्री परशुराम संस्कृत महाविद्यालय, शहर में श्री दैवी संपद ब्रह्मचर्य संस्कृत महाविद्यालय मुमुक्षु आश्रम है। वित्तविहहीन में कलान का सेठ गयादीन संस्कृत महाविद्यालय गुंदौरा दाउदपुर तथा श्री ब्रजराज संस्कृत महाविद्यालय भर्रामई शामिल हैं।
चारों एडेड महाविद्यालयों में शास्त्री व आचार्य की 80-80 सीटें उपलब्ध है, तो वित्तविहीन में शास्त्री की 80 सीटें हैं।
श्री दैवी संपद ब्रह्मचर्य संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. करुणाशंकर तिवारी ने बताया कि संस्कृत महाविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया जल्द शुरू होंगे। इंटरमीडिएट उत्तीर्ण वह सभी विद्यार्थी प्रवेश के लिए तैयारियां कर लें, जोकि शास्त्री करना चाहते हैं।