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Shahjahanpur News: चार महीनों के बाद बंधनमुक्त हुए संजीव...घर लौटकर बयां किया दर्द

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खुटार के गांव गे​हुंआ निवासी  संजीव उर्फ अंकित। संवाद
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खुटार (शाहजहांपुर)। गांव गेहुंआ के संजीव उर्फ अंकित मिश्रा चार महीने के बाद किसी तरह घर पहुंचे। वह दिल्ली में एक मकान में बंधक थे वहां उनसे बच्चों के वॉकर, झूले आदि बनवाए जा रहे थे। वापस आने पर उन्होंने अपनी पीड़ा को बयां किया। बताया कि उन्हीं की तरह कई और लोग भी वहां बंधक बने हुए हैं। उनसे काम लिया जा रहा है। सुधीर यह नहीं बता पाए कि उन्हें दिल्ली में कहा बंधक बनाकर रखा गया था।
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संजीव मिश्रा 10 मार्च को लापता हो गए थे। उनके तहेरे भाई सुधीर मिश्रा की तहरीर पर पुलिस ने 16 मार्च को गुमशुदगी दर्ज की। पुलिस ने संजीव का मोबाइल सर्विलांस पर लगवाया। उनका मोबाइल राजस्थान का निखिल चला रहा था। पुलिस के बात करने पर उसने मोबाइल ऑफ कर लिया।
कुछ दिन बाद संजीव का मोबाइल फिर ऑन हुआ और राजस्थान का ही अक्षय मोबाइल का प्रयोग करते मिला। पुलिस को अक्षय ने बताया कि उसने मोबाइल हरियाणा के संजीव गुर्जर से लिया है। पुलिस हरियाणा गई लेकिन संजीव गुर्जर का कोई पता नहीं चल सका।
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इसके बाद परिजनों ने एसपी से मुलाकात की। तब 20 मई को निखिल, अक्षय और संजीव गुर्जर को नामजद करते हुए उनके खिलाफ अपहरण समेत कई धाराएं बढ़ाई गईं। मामले के विवेचक दरोगा सुभाषचंद्र की लापरवाही भी रही। वह आरोपी नहीं पकड़ सके और परिजनों को टरकाते रहे।
इस बीच दो दिन पहले संजीव बीमार हालत में घर पहुंच गए। संजीव ने बताया कि नौकरी की तलाश में दिल्ली जाने के दौरान पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर निखिल, अक्षय ने उनका मोबाइल छीन लिया था। इस बीच जगतराम नाम का एक व्यक्ति उनको मिला और नौकरी लगवाने के नाम पर दिल्ली में ही अपने घर ले गया।
तीन मंजिला मकान की दो मंजिलों पर बच्चों के वॉकर, झूले आदि बनाने का काम होता है। जगतराम ने उनको घर में बंधक बनाकर काम कराना शुरू कर दिया। वह खाना नहीं देता था, साथ ही पीटता और बंद रखता था। चार दिन पहले वह किसी तरह भागकर घर पहुंचे। उनके भाई सुधीर मिश्रा ने बताया कि वह भाई काे लेकर एसपी से मिलेंगे और बंधक बनाने वालों पर कार्रवाई की मांग करेंगे।
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तिलहर क्षेत्र का आर्येंद्र और बनारस के दंपती सहित चार लोग अब भी बंधक
संजीव के अनुसार, जगतराम के घर में तिलहर क्षेत्र के आर्येंद्र, वाराणसी क्षेत्र के एक दंपती और एक अन्य व्यक्ति अब भी बंधक हैं। बंधकों को नहाने और कपड़े तक नहीं बदलने दिए जाते हैं। उन्हें बस जगतराम के घर के सामने की एक दुकान पर लिखा मोबाइल नंबर और जगतराम की स्कूटी का नंबर याद है।
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संजीव के अपहरण का मुकदमा दर्ज है। संजीव घर आ गए हैं, उसके बयान के आधार पर जांच कर कार्रवाई कराई जाएगी।
-प्रवीण मलिक, सीओ पुवायां
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