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यूक्रेन संकटः खाना हआ खत्म, बिस्किट खाकर समय गुजार रहा सानी

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मीरानपुर कटरा निवासी एहतेशाम अपने परिजन के साथ में - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। महमंद जंगला निवासी मोहम्मद आसिफ के बेटे मोहम्मद सानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उसके पास खाने का सामान खत्म हो गया। भूख लगने पर बिस्किट खाकर व पानी पीकर समय गुजार रहा है। यूक्रेन के बेस्टोचीन के प्राइमरी स्कूल में ठहरे सानी ने बॉर्डर तक पहुंचने के लिए बस की बुकिंग की है। इसके लिए प्रत्येक छात्र को पांच सौ डॉलर चुकाने होंगे। 1400 किमी का सफर तय कर लवीव पहुंचने के बाद सानी की वापसी होने की उम्मीद बंधेगी।
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यूक्रेन के खारकीव में फंसे मोहम्मद सानी हालात खराब होने के बाद रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया था। स्टेशन पर ट्रेन नहींमिलने के कारण उसे पैदल ही चलना पड़ा। सानी के साथ में हॉस्टल के इंचार्ज भी हैं। पूरा ग्रुप हाथ में तिरंगा लेकर यूक्रेन के बेस्टोचीन पहुंचा था। दो दिन से वहीं ठहरे हुए हैं। उनका भारतीय दूतावास से संपर्क भी नहीं हो पा रहा। लगातार फोन करने के बाद भी कॉल रिसीव नहीं हो रही। ऐसे में छात्रों ने खुद ही बॉर्डर तक पहुंचने की तैयारी की है। छात्रों ने ट्रैवल एजेंट से बात कर बस को बुक किया है। बेस्टोचीन से लवीव तक 1400 किमी का सफर तय करने के लिए प्रत्येक छात्र को पांच सौ डॉलर चुकाने होंगे। शनिवार को मोहम्मद आसिफ ने बताया कि सुबह दस बजे बेटे का फोन आया था। बस के जरिए लवीव बॉर्डर तक छात्र पहुंचेंगे। इसके बाद वापसी की उम्मीद है।
मोबाइल की चार्जिंग भी खत्म होने लगी
दो दिन से बेस्टोचीन में फंसे मोहम्मद सानी की मोबाइल की चार्जिंग भी खत्म होने लगी है। मोबाइल चार्ज करने की व्यवस्था न होने के कारण उसका संपर्क परिजन से टूट जाएगा। वहीं दूसरी तरफ खाने का सामान भी खत्म हो गया। बैग में रखे बिस्किट के जरिये ही पेट की आग को शांत कर रहा। आसिफ ने बताया कि बेटे को खाना तक नहीं मिल पा रहा।
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1400 किमी का सफर दो दिन में होगा तय
बेस्टोचीन से लवीव बॉर्डर तक 1400 किमी का सफर तय करने में सानी को दो दिन का समय लगेगा। उसने शनिवार को पिता आसिफ से कहा कि फोन का इंतजार नहीं करना। दो दिन तक लगातार सफर करना है। रूस का बॉर्डर खुला न होने के कारण लवीव जाना पड़ेगा।
तिलहर। मीरानपुर कटरा निवासी एहतेशाम रोमानिया से शनिवार सुबह अपने घर पहुंच गए। बेटे की सकुशल वापसी से पूरा परिवार काफी खुश है। अब परिजन बेटे के नाम से सदका उतारकर गरीबों में बांटेंगे। एहतेशाम ने बताया कि युद्ध छिड़ने के बाद उन्हें काफी दुश्वारियों से जूझना पड़ा। पोलैंड बॉर्डर पर माइनस 12 डिग्री में दो दिन और दो रातें गुजारीं। सिर पर छत नहीं थी। हवा के झोंके चुभ रहे थे। अल्लाह का शुक्र है कि वापस आ गए।
मीरानपुर कटरा के मोहल्ला बंगशान निवासी ईंट भट्ठा स्वामी मोहम्मद जाहिद का बड़ा पुत्र एहतेशाम शाहिद यूक्रेन के लवीव में एमबीबीएस करने गया था। हालात बिगड़ने के बाद एहतेशाम रविवार को दो बजे अपने 12 दोस्तों के साथ बस से रोमानिया के लिए चला था। सोमवार सुबह रोमानिया बॉर्डर से पहले उन्हें बस ने छोड़ दिया। वह कई किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया सीमा पर पहुंचे। शुक्रवार शाम को हवाई जहाज के जरिये वह दिल्ली पहुंच गया। सुबह मीरानपुर कटरा स्थित आवास पर पहुंचने पर एहतेशाम का मां शहाना बेगम, भाई मोहम्मद अफ्फान, बहन हिरा जाहिद, मामा मोहम्मद रिजवान और चाचा मोहम्मद जावेद ने स्वागत किया।
फोटो नंबर 5
खारकीव छोड़ने के 15 मिनट बाद ही गिरी थी मिसाइल
शाहजहांपुर। मेडिकल स्टोर संचालक गिरीश अवस्थी का पुत्र हर्ष अवस्थी भी यूक्रेन के खारकीव से शनिवार सुबह घर लौट आया। बेटे के सकुशल लौटने के बाद परिजन ने पूजा-अर्चना की। आनंदपुरम कॉलोनी निवासी हर्ष अवस्थी ने खारकीव के हालात खराब होने के बाद 28 फरवरी को हंगरी जाने के लिए बस पकड़ ली थी। उसके बाद ट्रेन से सफर तय कर हंगरी बॉर्डर पर पहुंचे। हर्ष बताते हैं कि वह खुशनसीब थे। उनके खारकीव से निकलने के 15 मिनट के बाद वहां पर मिसाइल से हमला किया गया था। हंगरी बॉर्डर पर उन्हें कई घंटे तक इंतजार करना पड़ा। यूक्रेन के नागरिकों को प्राथमिकता देने व इंडियन के साथ भेदभाव किया जा रहा था। लेकिन, दूतावास से संपर्क करने के बाद बॉर्डर को पार करा दिया गया। वहां से बूडापेस्ट से हवाई जहाज से सफर कर सीधे दिल्ली पहुंच गए। बेटे के वापस आने के बाद परिजन काफी ज्यादा खुश हैं। संवाद
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फोटो नंबर 15
उपस्थिति, अर्थदंड के डर ने यूक्रेन में रुकने पर किया मजबूर
- कक्षा से अनुपस्थित रहने पर 200 रुपये जुर्माना यूनिवर्सिटी की ओर से लगाया जाता था
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। रूस पर हमले के बाद यूक्रेन की भयावह स्थिति को नजदीक से देखने वाले छात्र-छात्राएं अपनी मर्जी से नहीं रुके थे, बल्कि उन्हें रुकने पर मजबूर किया था। यूनिवर्सिटी मई में होने वाली परीक्षा को लेकर छात्रों को वापस नहीं भेजना चाहती थी। वहीं छात्र एक दिन क्लास में नहीं आने पर 200 रुपये प्रतिदिन जुर्माने व अन्य सजा के कारण आने से कतरा रहे थे। जब वहां के हालात खराब हुए तो यूनिवर्सिटी ने खुद ही छात्रों को वापस जाने की अनुमति दे दी। रूस ने यूक्रेन के खिलाफ 25 फरवरी को युद्ध की घोषणा कर दी थी।
हालांकि दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए एक सप्ताह पहले ही हालात खराब होने का अनुमान लगाया जाने लगा था। इस बीच विश्वविद्यालयों ने छात्रों को वापसी के लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं की। इसके चलते छात्र वहां पर रुके रहे। लेकिन, जब हालात खराब हुए तो यूनिवर्सिटी ने हाथ खड़े करते हुए सभी को वापसी की अनुमति दे दी। इस बीच छात्र काफी दिक्कतों से दो-चार होते हुए अपने घर पहुंचे। मोहल्ला खलीलगर्वी निवासी डॉ. मोहम्मद मजीद की बेटी इंतेसाम उर्फ जिया भी विनिस्तिया में फंसी थी। डॉ. मजीद बताते हैं कि व्यावसायिक कोर्स में हर विश्वविद्यालय में सौ प्रतिशत उपस्थिति होना जरूरी होता है। बेटी की यूनिवर्सिटी में एक दिन कक्षा से अनुपस्थित रहने पर कम से कम दो सौ रुपये जुर्माना और उस दिन कक्षा में किए वर्क को दस बार करना होता था। ऐसे में छात्र कक्षा से अनुपस्थित रहने से घबराते हैं। कक्षा से गायब रहने पर छात्र के रुपये भी खर्च होते हैं। साथ ही होमवर्क का दोगुना बोझ पड़ता है। उसके बाद डीन और क्लास टीचर से हस्ताक्षर कराने के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय नहीं चाह रहा था कि छात्रों की घर वापसी हो। क्योंकि छात्र घर लौट आते तो सेमेस्टर पूरे होना संभव नहीं था। जुर्माने और होमवर्क के दोगुने बोझ के चलते कोरोना महामारी के दौरान भी छात्र वापस नहीं लौटे थे।

ोहम्द सानी- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

अपने पिता के साथ इंते शाम उर्फ जिया ।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

यूक्रेन से लौटने के बाद हर्ष अवस्थी अपने घर पर परिजन के साथ में । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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