शाहजहांपुर/रोजा। बरेली में सब्जी की डेलापीर थोक मंडी की तरह महानगर की रोजा मंडी में भी फल-सब्जी के आढ़ती फलों से लेकर हरी सब्जियों को चमकाने और रंगने के लिए घातक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन मंडी के अधिकारी ऐसे मामलों की अनदेखी करके सेहत के दुश्मनों को क्लीन चिट देने पर आमादा हैं। अदरक को तेजाब से चमकाने के साथ ही पुराने आलू को तेजाब से धोकर नया बनाने का धंधा किसी से छिपा नहीं है। इसके बावजूद मंडी प्रशासन के स्तर से ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के अधिकारी संबंधित कारोबारियों से आंखें फेरे हुए हैं।
रोजा मंडी में फल-सब्जी के 110 लाइसेंसी आढ़ती हैं। अधिकतर हरी सब्जियों की आवक स्थानीय ग्रामीणों के जरिये होती है। पूरे साल में एक-दो माह का ऐसा दौर आता है, जब स्थानीय आवक कम होने पर आढ़ती टमाटर, बैंगन, करेला, लौकी, तोरई, टिंडा, परवल, भिंडी आदि सब्जियां बाहर से मंगाते हैं। बाहर से ट्रकों से आने वाली हरी रंगत वाली सब्जियां कुम्हलाने पर उन्हें आढ़ती रात में पानी छिड़ककर ढक देते हैं और सुबह मंडी में नीलामी शुरू होने से पहले उन्हें तरोताजा दिखाने के लिए हरे कलर में रंगकर उनकी ढेरियां लगा देते हैं। ऑफ सीजन में आने वाले मटर दाना को हरा दिखाने के लिए उसका भी इसी तरह ट्रीटमेंट कर दिया जाता है।
बरसात के सीजन में पुराने आलू के स्टार्च में मिठास बढ़ जाने पर उसकी मांग घट जाती है। ऐसे में आढ़ती आलू को तेजाब मिश्रित पानी में कुछ घंटे डाल देते हैं। इससे आलू में चमक आने के साथ उसका छिलका उतरने लगता है और हल्की गुलाबी रंगत मिलने पर उसे नए आलू के थोक रेट पर फुटकर सब्जी विक्रेताओं को सप्लाई कर देते हैं। इसी तरह अदरक गांठों पर लिपटी मिट्टी हटाने और उसके कीड़े मारने के लिए उसे भी तेजाब मिश्रित पानी से साफ कर सफेद बना दिया जाता है। फलों में भी इसी तरह का घालमेल आम बात है। मंडी की आढ़तों पर गर्मी के सीजन में आम और साल के बाकी दिनों मेें केला, पपीता पकाने के लिए प्रतिबंधित कारबाइड इस्तेमाल किया जाता है।
इसको लेकर फुटकर सब्जी विक्रेताओं ने कई बार आपत्ति उठाई, लेकिन मंडी समिति के अधिकारियों ने ऐसे मामलों में अपने स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की। खास यह है कि डेलापीर मंडी में पिछले सप्ताह सब्जियां रंगने के लिए केमिकल से भरा ड्रम पकड़े जाने के बाद मंडी निदेशक ने मंडल की सभी मंडियों में सब्जी आढ़तों की सघन जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन स्थानीय मंडी के अधिकारियों ने अभी तक ऐसा करने की जरूरत नहीं समझी। मंडी सचिव नवीन कोहली के अनुसार बड़े शहरों की तरह रोजा मंडी मेें सब्जियों की इतनी आवक नहीं होती कि आढ़तीयों को अपना स्टॉक सुरक्षित रखने के लिए केमिकल का सहारा लेना पड़े।
सब्जी के थोक आढ़तियों की बात
रोजा मंडी में इतनी अधिक सब्जी नहीं आती कि उसका स्टॉक सहेजा जा सके। रात में जो सब्जी आती है, उसे सुबह होते ही फुटकर विक्रेता और होटल वाले खरीद ले जाते हैं। ऐसे में केमिकल और कलर लगाने का कोई सवाल नहीं उठता। - रामरतन, अटसलिया
सब्जी मंडी नेशनल हाईवे पर है और पास में ही थाना है। सब्जी मंडी के बीच में पुलिस चौकी बनी है। इस कारण यहां पर इस तरीके का ऐसा कोई काम नहीं होता है जिससे कि सब्जी विक्रेताओं को पुलिस के जरिये बेइज्जती का सामना करना पड़े। - विजय कुमार, आदर्शनगर
रोजा मंडी में अभी तक केमिकल से सब्जियां रंगने की कोई शिकायत नहीं मिली है। मंडी के अधिकारियों से भी ऐसी कोई सूचना नहीं मिली। इसके बावजूद बरेली के घटनाक्रम को देखते खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क कर दिया गया है और रोजा मंडी की सब्जी आढ़तों पर आकस्मिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
- विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग