ददरौल ब्लाक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल अकर्रा रसूलपुर में सोमवार को वार्षिक परीक्षा का पहला दिन रस्म अदायगी तक सीमित रहा। पहली पाली में विद्यालय में नाममात्र के बच्चे ही परीक्षा देने पहुंचे। दूसरी पाली में एक भी बच्चा परीक्षा देने के लिए नहीं पहुंचा। बच्चों ने सोमवार को भी मिड डे मील नहीं खाया।
प्राथमिक विद्यालय अकर्रा रसूलपुर में नामांकित 326 बच्चों में से 29 और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 323 में 17 बच्चे ही परीक्षा देने के लिए पहुंचे। अधिकांश बच्चों ने उत्तर पुस्तिकाओं पर कुछ भी नहीं लिखा। दूसरी पाली में परीक्षा देने कोई भी बच्चा नहीं आया। प्राइमरी स्कूल के शिक्षक कृष्ण कुमार, गीता वर्मा, अपर्णा तथा जूनियर स्कूल के शिक्षक हरजीत रानी, मोहम्मद दानिश, प्रीति और सौम्या ने यह जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी भगवान राव को दी।
सोमवार को सुबह ही बीएसए राजेश वर्मा विद्यालय पहुंच गए और रसोइयों को छात्र-छात्राओं को बुलाने के लिए भेज दिया। मौके पर पहुंचे अभिभावकों ने बीएसए से कहा कि मॉडल स्कूल यहीं बनना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो गांव का कोई बच्चा स्कूल नहीं जाएगा। गांव के लोगों में बीएसए के खिलाफ आक्रोश थम नहीं रहा है। ग्रामीणाें का कहना है कि वे लोग प्रधानाध्यापक मुदित सेठ और मॉडल स्कूल दोनों को गांव के स्कूल में ही रखा जाए। भगवान राव और एनपीआरसी रूफिया खान ने अभिभावकों से बच्चों को परीक्षा में भेजने का आग्रह किया, लेकिन फिर भी छात्र संख्या काफी कम रही।
इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश वर्मा ने कहा कि जिन विद्यार्थियों की परीक्षा छूट गई है, उनको एक मौका और दिया जाएगा। बच्चों को बुलाया गया था और परीक्षा दी है।