रोजा में बनेगी लोकोमोटिव वर्कशाप
- फोटो : श्ााहजहांपुर उत्तर प्रदेश्ा
छह अक्तूबर को रोजा में उच्च तकनीकी के लोकोमोटिव वर्कशाप की आधारशिला डीआरएम मुरादाबाद रखेंगे। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। पुराने लोको शेड को चमकाया जा रहा है। रेलवे के बढ़ते यातायात दबाव के कारण आए दिन डीजल इंजन के रखखाव में रेलवे को बाधा आ रही थी जिसके रिपेयर का वर्कशाप गाजियाबाद और लखनऊ में है। यदि गाजियाबाद से लखनऊ स्टेशनों के बीच इंजनों को तकनीकी खराबी के कारण रुकना पड़ता था तथा उसे रिपेयर के लिये वर्कशाप भेजने मे समय की बर्बादी होती थी और रेलवे को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़तथी ।इन समस्याओ को देखते हुयें रेल मंत्रालय में रोजा में 250 डीजल इंजनो की उच्च कोटि की मरम्मत के लिये लोकोमोटिव शेड की स्थापना की हरी झंडी दे दी थी जिसका काम अमेरिका की जी इ कंपनी को दिया गया था। रेल सूत्र बताते हैं कि छह अक्तूबर को लाकोमोटिव वर्कशाप की आधारशिला रखने के लिये डीआरएम मुरादाबाद प्रमोद कुमार और जीइ कंपनी के उच्च अधिकारी रोजा में आ रहे है। यद्यपि कि इस पूरे मामले की आधिकारिक रूप से पुष्टि नही की गयी।
रेलवे के टीआरडी के पावर हाउस के पास जी इ कम्पनी के इंजीनियरों ने वर्कशाप की आधारषिला का खाका तैयार कर लिया है और मंगलवार को पण्डाल आदि लगाने का काम शुरू हो गया। लोको प्रभारी ने बताया कि अभी लिखित रूप से कोई प्रोग्राम नही आया है लेकिन कंपनी कर्मियो द्वारा आधारशिला रखने का काम जोरों पर है।
23 साल बाद लोकोशेड में दिखेंगे जिंदगी के रंग
रोजा। 23 साल बाद रोजा के वीरान पड़े लोकोशेड में एक बार फिर जिंदगी के रंग देखने को मिलेंगे। याद दिला दें कि अंग्रेजों के समय से यहां स्थापित किया गया स्टीम शेड साल 1993 में खत्म कर दिया गया और धुआं छोड़ता स्टीम इंजन इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गया। 125 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में फैला यहां का लोको शेड बीराने मे तब्दील हो गया मानो यहां जीवन ठहर सा गया हो। लेकिन रेल मंत्रालय की दरियादिली से 250 डीजल इंजनों के वर्कशाप को मंजूरी मिलते ही यहां के लोगो के जीवन मे जैसे चमक आ गयी हो उनका मानना है कि वर्कशाप में काम करने वालो की वजह से यहां रोजगार के संसाधन के साथ लोगों की आय और व्यापार का रास्ता साफ होगा सामाजिक दौड़ मे पिछड़ रहे इस क्षेत्र के विकास के लिये यह वर्कशाप मील का पत्थर साबित होगा।