होली के मौके पर घर जल्दी पहुंचने की आपाधापी में कामकाजी और नौकरीपेशा तबके के लोगों ने बुधवार शाम से ट्रेनें पकड़नी शुरू कर दीं। जो लोग नहीं निकल पाए या जिन्हें रेलवे टिकट पर रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं हुआ, उन्होंने विकल्प के तौर पर बृहस्पतिवार को सुबह से बस स्टेशन की ओर रुख करना शुरू कर दिया। यात्रियों का दबाव बढ़ा तो रोडवेज अफसरों ने बसों के मूवमेंट का काम खुद संभाला और जिधर के यात्री ज्यादा दिखे, बसों के रूट बदलकर उन्हें उसी ओर डाइवर्ट कराया।
रोडवेज डिपो के स्थानीय बेड़े में निगम की 101 बसें हैं। इनमें से 35 बसें दिल्ली रूट पर चलती हैं, लेकिन होली के दिन बरेली, मुरादाबाद, रामपुर के यात्रियों ने उमड़ना शुरू किया तो दिल्ली रूट पर 20 अतिरिक्त बसें बढ़ा दी गईं। इसी तरह कम दूरी वाले स्थानीय मार्गों पर रेल सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण गौरीफंटा, पलिया, पुवायां, बंडा, खुटार, जलालाबाद, मदनापुर, कांट, मोहम्मदी, गोला आदि मार्गों पर बसों को शटल सेवा केतौर पर चलाया गया।
डग्गामार वाहनों पर भारी पड़ी लोहिया ग्रामीण सेवा
खास यह रहा कि 25 फीसदी कम किराए वाली लोहिया ग्रामीण सेवा की सभी छह बसें दो दिन से फुल चल रही हैं और उनमें खड़े होने को भी जगह नहीं मिल रही है। इन बसों को ऐसे मार्गों पर चलाया जा रहा है, जहां अभी तक रोडवेज सेवा उपलब्ध नहीं थी। इनमें सफर भी सस्ता होने से मुसाफिरों ने इन बसों को प्राथमिकता दी। अभी तक डग्गामार वाहन कम किराए का लालच देकर यात्री बिठाते रहे, लेकिन अब उतने ही किराए में लोहिया ग्रामीण बसें चलने से डग्गामार वाहनों पर इन बसों का संचालन भारी पड़ने लगा है।
सीतापुर-हरदोई पर चलीं स्पेशल बसें
यहां से उधरनपुर, शाहाबाद, हरदोई, जहानीखेड़ा, मैगलगंज, सीतापुर जाने वालों का भी रोडवेज अफसरों ने खास ख्याल रखा। इन सभी स्थानों को कवर करने केलिए बृहस्पतिवार को एआरएम रामबहादुर यादव ने सीतापुर और हरदोई रूट पर स्पेशल बसें चलवाईं। रोडवेज के स्टेशन प्रबंधक सुशील त्रिवेदी के अनुसार जलालाबाद-फर्रुखाबाद रूट पर हर 15 मिनट में बसें चलाई जा रही है।