तिलहर (शाहजहांपुर)। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार देर रात गांव धनेली पल्टू के पास हादसा हो गया। ब्रेक लेने से अचानक रुके ट्रक से टकराने से रोडवेज बस के चालक बरेली के थाना हाफिजगंज क्षेत्र के गांव रम्पुरा निवासी प्रमोद कुमार (30) की मौके पर ही मौत हो गई। परिचालक समेत पांच सवारियां घायल हो गईं। हादसे के बाद हाईवे पर शाहजहांपुर से बरेली जाने वाली लेन पर करीब आधा घंटे यातायात बाधित रहा। वहीं, बरेली में चालक की मौत को लेकर बस चालकों ने हड़ताल कर दी। इससे यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।
हादसा बुधवार की रात करीब 1:40 बजे हुआ। रोडवेज डिपो की बस शाहजहांपुर से बरेली के लिए जा रही थी। बस में करीब 20 सवारियां बैठी हुईं थीं। जैसे ही बस तिलहर थाना क्षेत्र गांव धनेली पल्टू के पास पहुंची, तभी आगे चल रहे ट्रक के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए। बस ट्रक में जा घुसी। इस बीच एक अन्य ट्रक भी रोडवेज बस से टकरा गया।
बस का आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। चीख-पुकार सुनकर लोग दौड़ पड़े। बस चालक बुरी तरह से घायल हो गया। पुलिस ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह चालक प्रमोद को बाहर निकालकर सीएचसी तिलहर भेजा, लेकिन उनकी जान नहीं बच सही।
हादसे में फर्रुखाबाद जिले के थाना महमूदाबाद क्षेत्र के गांव सकबाई निवासी बस परिचालक मुनेश कुमार घायल हो गए। वहीं, सवारियों में सीतापुर के लहरपुर के गांव बहादुरपुर निवासी मुकेश, उनकी पत्नी प्रीति, पुत्र सार्थक, थाना हरगांव के गांव नखुरीकलां निवासी नितिन कुमार और उनका सात वर्षीय पुत्र गोलू सिंह घायल हो गए।
सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद सभी को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस ने क्षतिग्रस्त रोडवेज बस को हाईवे के किनारे हटवाकर बाधित हुए यातायात को सुचारु कराया। हादसे के बाद ट्रक चालक की तलाश में पुलिस टीम लगाई गई हैं। सवारियों को दूसरे वाहनों से उनके गंतव्य के लिए भेजा गया। सीओ तिलहर इशिका सिंह ने बताया कि तहरीर प्राप्त होने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
शव को देख बिलख पड़े परिजन
तिलहर सीएचसी पर बस चालक प्रमोद के शव को देखकर पत्नी रेखा देवी बेसुध हो गईं। उनके बेटे वैभव की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई है। प्रमोद की मौत से उनके पिता शिशुपाल, मां सोनतारा, भाई रणवीर, रंजीत, अनुज, बहन सुनीता गुमसुम हो गए हैं।
आठ घंटे की ड्यूटी के बाद नहीं दिया था चालक को रेस्ट
बरेली। आठ घंटे की ड्यूटी के बाद चालक को रेस्ट देने का नियम है, लेकिन इस मामले में इसकी अनदेखी की गई। प्रमोद के साथी चालक सतीश यादव ने बताया कि लंबी दूरी के बसों पर दो चालक लगाए जाते हैं, जबकि इस मामले में प्रमोद से लगातार ड्यूटी कराई गई। पहले उसको दिल्ली भेजा गया, वहां से लौटने पर उत्तराखंड के टनकपुर भेजा गया। वहां से लौटते ही लखनऊ भेज दिया गया। लगातार 1300 किमी दूरी तय करने और नींद न पूरी होने के कारण यह हादसा हुआ है।
सतीश ने कहा कि इसके लिए उच्चाधिकारी जिम्मेदार हैं जो हमेशा नौकरी से बाहर निकालने का दबाव बनाते रहते हैं। चालकों व परिचालकों का आरोप है घटना के बाद तुरंत उपचार मिलता तो शायद उनके साथी की मौत न होती। हड़ताल की जानकारी पर सुबह सात बजे एआरएम एके वाजपेयी मौके पर पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। प्रमोद के पिता शिशुपाल भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे। शव के पोस्टमाॅर्टम के बाद चालकों-परिचालकों के बुलावे पर सुबह 10 बजे वह भी सेटेलाइट बस अड्डे पर आ गए।
यहां चालक-परिचालक प्रमोद की पत्नी को नौकरी और एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। दोपहर 12:30 बजे एआरएम एके वाजपेयी दोबारा आए तो शिशुपाल व चालकों-परिचालकों को अपने साथ सेटेलाइट बस अड्डे ले गए। वहां बातचीत के बाद अपराह्न दो बजे से बसों का संचालन शुरू हो सका।
पिता को दी 70 हजार की आर्थिक सहायता
मृत चालक के पिता शिशुपाल को परिवहन निगम की तरफ से अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये, यात्री सुविधा के तहत हादसे में मृतकों को दिए जाने वाले 7.50 लाख रुपये में से 50 हजार रुपये की मदद दी गई। बाकी रकम वारिसान का प्रमाणपत्र लाने पर आश्रितों को दी जाएगी। प्रमोद की पत्नी रेखा (28) का रोकर बुरा हाल है, जबकि छह माह का बच्चा लल्ला इससे अनजान है कि उसके सिर से पिता का साया उठ गया है।
-बसों का संचालन न होने के पीछे दो-चार अराजक कर्मचारियों का हाथ था। उन्होंने अपनी बसों को सड़क पर आगे लगा दिया था, जिससे पीछे के वाहन नहीं निकल सके। मृतक के पिता को 70 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। आगे वारिसान का प्रमाणपत्र लाने पर बाकी धनराशि दी जाएगी। - एके वाजपेयी, एआरएम रुहेलखंड डिपो
आलाधिकारियों को नहीं दी घटना की जानकारी, लखनऊ से घंटी बजने पर मची खलबली
बरेली। शाहजहांपुर में चालक की मौत के मामले को रोडवेज के अफसर आठ घंटे तक दबाए रखे। खुद खलीफा बनने के चक्कर में जिले के आलाधिकारियों तक को मामले की जानकारी नहीं दी। यही कारण रहा कि मांग पूरी करने का आश्वासन देकर जो हंगामा कुछ देर में शांत कराया जा सकता था, वह कई घंटे तक चलता रहा।
दोपहर करीब एक बजे लखनऊ से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय प्रधान ने जब जिलाधिकारी अविनाश सिंह को कॉल की तो उन्होंने रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंध मोहम्मद अजीम, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक एके बाजपेई, एआरएम फाइनेंस राम अग्रवाल, ओएजी-फर्स्ट निर्भय वर्मा व जगमोहन यादव को तलब कर लिया। फटकारने के साथ ही कार्रवाई तक की चेतावनी दे डाली।
डीएम ने मृत चालक प्रमोद कुमार के पिता शिशुपाल से बात की तो वह फफक पड़े। डीएम ने उनको ढांढस बंधाते हुए साढ़े सात लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। कहा कि मृतक आश्रित को संविदा पर नौकरी दिलाने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा जा रहा है। वहां से आदेश मिलने के बाद कार्रवाई पूरी की जाएगी। ब्यूरो
बस चालक प्रमोद कुमार का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन- फोटो : भिनगा कस्बे में बुधवार की रात बारिश के दौरान गुजरते वाहन।
बस चालक प्रमोद कुमार का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन- फोटो : भिनगा कस्बे में बुधवार की रात बारिश के दौरान गुजरते वाहन।