शाहजहांपुर से खुटार जा रही रोडवेज बस की चपेट में आने से बाइक सवार तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएं शामिल हैं। हादसे के दौरान बाइक बस में फंसकर काफी दूर तक घिसटती चली गई। पुलिस ने मृतकों के परिवार वालों का इंतजार किए बगैर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। इससे गुस्साए घरवालों ने थाने के सामने जाम लगा दिया और जमकर हंगामा किया।
खीरी के मोहम्मदी थाना के क्षेत्र के गांव दिउलरिया निवासी दाताराम के घर उसकी सास भीरा थाना क्षेत्र के गांव महेशापुर निवासी प्र्रेमराज की पत्नी 60 वर्षीय मायादेवी आई हुई थीं। शनिवार को दाताराम की पत्नी 40 वर्षीय मालती देवी मां मायादेवी के साथ खुटार में खरीददारी करने जाना चाहती थीं। इसके लिए दाताराम ने पास के गांव मस्तीपुर निवासी सियाराम यादव के 20 वर्षीय पुत्र अवनीश को बाइक सहित बुलाया और पत्नी तथा सास को उसके साथ खुटार भेज दिया। खरीदारी करने के बाद घर लौटते समय खुटार-पुवायां मार्ग पर गांव रौतापुर कलां मोड़ से कुछ पहले शाहजहांपुर की ओर से जा रही रोडवेज बस ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में अवनीश, मालती और मायादेवी की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद ड्राइवर और कंडक्टर बस छोड़कर भाग गए।
सूचना पाकर खुटार पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाइक के कागजात और मृतकों के पास मिले मोबाइलों से परिवार के लोगों को हादसे की सूचना दी। हादसे के एक घंटे बाद जब परिवार के लोग थाने पहुंचे तो शव नहीं मिलने पर हंगामा करते हुए बस में तोड़फोड़ की कोशिश की। पुलिस ने बमुश्किल लोगों को बस के पास से हटाया। मालती देवी के पति दाताराम ने आरोप लगाया कि हादसे की जानकारी पाकर वह मौके पर पहुंचे तो पुलिस उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाकर घुमाती रही। जब उन्होंने शव दिखाने को कहा तो उनकी पिटाई कर दी। दातराम की बात सुनकर उत्तेजित भीड़ ने थाने के सामने हाईवे पर जाम लगा दिया। सूचना पर बंडा, पुवायां, सिंधौली सहित कई थानों की फोर्स के साथ सीओ सुमित शुक्ला, तहसीलदार केएम दीक्षित, नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र कुमार आदि पहुंचे, लेकिन लोगों ने शव वापस लाने और बस चालक को पकड़कर सामने लाने की मांग करते हुए जाम खोलने से इंकार कर दिया। रात करीब आठ बजे सीओ के मामले में कड़ी कार्रवाई करने के आश्वासन पर भीड़ ने जाम खोल दिया।