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लखनऊ-दिल्ली राजमार्ग : आधा घंटे में तय हो रही चार किमी की दूरी

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लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर रौसर गांव के पास हाईवे पर बने गड्ढों से क्षतिग्रस्त हुई सड़क। ? - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के बरेली-सीतापुर खंड को फोरलेन बनाने के काम में ढिलाई के चलते बरेली मोड़ बाईपास से लेकर हरदोई मोड़ चौराहा तक कई जगह सड़क अधूरी पड़ी है और रूट डायवर्जन वाले स्थानों पर गड्ढों में बरसाती पानी भर जाने से हादसों का खतरा बढ़ गया है। हरदोई मोड़ के ओवरब्रिज के पूर्वी हिस्से पर मिट्टी कार्य अधूरा करके छोड़ दिया गया है, जबकि पश्चिमी छोर पर मिट्टी कार्य की अभी शुरुआत तक नहीं हो सकी है। ऐसे में हाईवे के इस हिस्से में गर्रा का पुल अधूरा पड़ा होने और बरेली मोड़ की दोनों सर्विस लेन खस्ताहाल हो जाने से लोगों को चार किमी की दूरी तय करने में 20 से 30 मिनट लग रहे हैं।
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हरदोई मोड़ चौराहा पर लखनऊ-पलिया हाईवे का यातायात गुजारने के लिए नेशनल हाईवे पर बनाए जा रहे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य करीब तीन वर्ष पहले शुरू हुआ था। तब से पुल का निर्माण पूरा होना तो दूर रहा, उसके दोनों ओर अब तक एप्रोच रोड भी नहीं बन पाई हैं। मुख्य चौराहे पर पिलर बनाकर पुल का ढांचा तैयार किया जा चुका है। पुल के ऊपर रोड का काम भी पूरा हो चुका है, लेकिन उसके दोनों ओर मिट्टी का भराव कर उसे मेन हाईवे से जोड़ने में लगातार लापरवाही की जा रही है।
ओवरब्रिज की पूर्वी दिशा में करीब चार माह पहले मिट्टी डालने का काम शुरू हुआ, लेकिन बाद में ठेकेदार ने हरदोई चौराहा के पास जाम की समस्या खत्म करने के लिए पुल के पश्चिमी छोर पर सर्विस लाइन का निर्माण करा दिया, लेकिन तब से मिट्टी कार्य अधूरा पड़ा है।
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हरदोई चौराहा से बरेली मोड़ चलने पर थोड़ा आगे बढ़ते ही रौसर गांव के पास हाईवे की बाईं लेन का बड़ा हिस्सा बारिश में उखड़ जाने से वहां गड्ढे बन गए हैं। गड्ढों में पानी भरा होने से वाहन चालकों को उनकी गहराई का अनुमान भी नहीं लग रहा और इसी वजह से दो दिन पहले वहां सामान से लोड एक ट्रक फंस जाने से जाम लगने की नौबत आ गई।
थोड़ा आगे नया खन्नौत पुल यातायात को चालू हो चुका है, लेकिन पुल के पिलर्स के पास पड़े जोड़ समतल नहीं किए जाने से वहां से गुजरते वक्त वाहनों की रफ्तार कम करनी पड़ती है। पुल के पास बारिश में किनारे की मिट्टी बह जाने से हाईवे की लेन भी किनारे से धंस रही है। गर्रा नदी का निर्माणाधीन पुल अब तक नहीं बन पाने से वहां वाहनों के लिए डायवर्जन संकेतक लगाए गए। इस जगह लगातार वाहनों के ब्रेक लेने और दिशा बदलने से सड़क का बजरी-कोलतार उखड़ रहा है। गर्रा पुल से लेकर बरेली मोड़ चौराहा तक दोनों सर्विस लेन भी भारी वाहनों के दबाव के कारण गड्ढों से छलनी हो चुकी है।
बरेली मोड़ के ओवरब्रिज के लिए पश्चिमी छोर पर मिट्टी कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन पुल के पूर्वी हिस्से में अभी यह काम होने मेें दो से तीन माह लगने का अनुमान है।
अधूरे हाईवे से परेशान लोगों की बात
हाईवे के निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी की लापरवाही से दो दिन काम होने के बाद चार-छह दिन के लिए बंद हो जाता है। इससे न तो पुल बन पा रहा है और न ही सड़क। -अमर सिंह, मिश्रीपुर
सड़क और पुल बनाने के काम मेें लापरवाही बरती जा रही है। अक्सर ठेकेदार के कर्मचारी जेसीबी मौके पर छोड़कर कई दिन को गायब हो जाते हैं। पुल बन जाए तो जाम नहीं लगेगा। -अमित कुमार, हरदोई मोड़ चौराहा
दस साल में हाईवे बनकर चालू नहीं हो पाना सरकारी तंत्र की ढिलाई को उजागर करता है। हमारे ट्रक अक्सर हाईवे पर गड्ढों की वजह से जाम में फंस जाते हैं। भाजपा के राज में ऐसी ढिलाई समझ से परे है। -नीरज गुप्ता, हौजरी व्यवसायी, शाहजहांपुर
हाईवे खराब होने से सबसे ज्यादा असुविधा कारोबारियों और उद्यमियों को हो रही है। बरेली माल भेजने में हुलासनगरा क्रॉसिंग बाधक बनती है। लखनऊ जाने को अटसलिया वाला लिंक रोड ज्यादा बेहतर है। -पंकज पांडेय, फर्नीचर निर्माता, बरेली मोड़
बारिश में निर्माण के बड़े कामों मेें रुकावट पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन हाईवे पर गड्ढों को बजरी-कोलतार लेपन से भरने का काम चरणबद्ध तरीके से शुरू करा दिया गया है। रोजा रेलवे ओवरब्रिज से लेकर जमुका के अटसलिया मोड़ तक गड्ढे ठीक कराए जा चुके हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को जिले की सीमा में आने वाले राजमार्ग के अन्य क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत जल्द कराने के निर्देश दिए गए हैं। -रामसेवक द्विवेदी, नोडल अधिकारी एनएचएआई / एडीएम प्रशासन
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