शाहजहांपुर। अन्नदाता किसान इस बार काफी मुश्किल में हैं। जिले में पर्याप्त वर्षा न होने से सूखे जैसे हालात हैं जिसमें प्रशासन भी प्रभावित किसानों को सूखा राहत देने की तैयारी कर रहा है। इधर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ों पर हुई भारी वर्षा का पानी आने से गंगा और रामगंगा में उफान आने लगा है। कलान के भैसार बांध पर 24 घंटे के दौरान गंगा का जलस्तर पांच सेमी बढ़ गया है। उधर, परौर क्षेत्र में रामगंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी तटीय गांवों की ओर बढ़ रही है।
गंगा की गोद में बसे मिर्जापुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के मजरा आजादनगर और इस्लामनगर में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। गांव के कच्चे रास्ते पर दो से तीन फिट तक पानी भर जाने से ग्रामीण सरकारी नाव से आवागमन कर रहे हैं। इस्लामनगर के दक्षिणी भाग की ओर भी बाढ़ का पानी बढ़ रहा है। इस्लामनगर-कमथरी संपर्क मार्ग बाढ़ से कट रहा है। जलालाबाद-शमशाबाद, एटा, मैनपुरी स्टेट हाईवे पर भी गांव चौरा के पास गंगा का पानी फिर आ गया है। चौरा-बसोला संपर्क मार्ग पर भी बाढ़ का पानी तेजी से चल रहा है। ढाईघाट गंगातट के निकट ग्राम चितार भी बाढ़ से चौतरफा घिर गया है। पैलानी उत्तर के प्रधान फारूक अली और समाजसेवी रिजवान अहमद ने बताया कि आजादनगर के चारों ओर पानी भर रहा है।
उधर रामगंगा भी उफान पर आने से पिछले वर्ष सिंचाई विभाग द्वारा गांव चिकटिया पहाड़पुर से मौजमपुर तक बनवाई गई रामगंगा नहर से बाढ़ का पानी ग्राम मौजमपुर से निकलकर पहरुआ और हरिहरपुर की ओर बढ़ रहा है। कोलाघाट का पक्का पुल चालू नहीं होने से उफनाती रामगंगा को कलान-मिर्जापुर क्षेत्र के लोग छोटी नाव से जान जोखिम में डालकर पार करने को मजबूर हैं। बैराज से और पानी छूटने पर जिले के करीब दस गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
परौर के तटीय गांवों की ओर फैलाव ले रही रामगंगा
परौर। रामगंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी अब फिर से मजरा मंजा समेत नारायणनगर पूर्वी की ओर फैलाव लेने लगी है। यह दोनों गांव पहले भी रामगंगा के तेज बहाव से कट चुके हैं। रामगंगा ने परोर के मजरा मोहनपुर व बिचपुरी बाजार को भी अपना निशाना बनाया है, लेकिन वहां तटबंध बन जाने से कटान कम हो गया है। अब नदी नारायण नगर पश्चिमी की ओर बढ़ रही है। इससे गांव के लोग काफी चिंतित हैं। सिंचाई विभाग ने वहां बाढ़ से बचाव को केवल खानापूरी करके कुछ स्थानों पर बालू की बोरियां लगवाई हैं। गांव के हरिओम, कृष्णपाल, झुमक लाल, रामविलास, बृजेश कुमार, सुनील कुमार, सोबरन आदि गांव के पास ठोकरें बनवाने की मांग की है।
नरौरा बैराज से तीन दिन पहले करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी निकालने से गंगा का जलस्तर थोड़ा बढ़ा है, लेकिन अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है। रामगंगा के किनारे के सभी गांव सुरक्षित हैं। नरौरा बैराज से निकल रहे पानी की मात्रा घटकर 58395 क्यूसेक हो गई है और अन्य बैराजों से रामगंगा में जा रहा पानी भी कम हो गया है। - सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग