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बरामद चावल, गाड़ी का नहीं मिला कोई दावेदार

Wed, 21 Jan 2015 12:09 AM IST
रोजा, शाहजहांपुर
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सोमवार को मालगाड़ी से लूटे गए चावलों की बरामदगी के बाद मामला उलझ गया। बरामद माल का कोई मालिक नहीं मिल सका है और न ही मौके से कब्जे में ली गई स्कार्पियो कार के मालिक की जानकारी हो सकी है। आरपीएफ  ने अपने यहां चोरी की घटना से इनकार किया है। घटना कहां से हुई, इसका मालिक कौन है? यही बिंदु पुलिस के लिए गले की हड्डी साबित हो रहा है।
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बता दें कि सोमवार को रोजा पुलिस ने मोंगा पंजाब से गुवाहटी जा रही मालगाड़ी ट्रेन के वैगनों की सील तोड़कर चावल भरे कई बोरे लूट लिए थे, जिन्हें पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ लिया था। इस मामले में तीन लोगों को असलहों सहित गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
विवेचना में अभी तक बरामद चावलों का मालिक कौन है? रेल अभिलेखों के अनुसार ये चावल एफसीआई का था, लेकिन घटना के दो दिन बाद तक एफसीआई के किसी अधिकारी ने इस बरामद चावल पर अपना दावा नहीं ठोका है। मौके से कब्जे में ली गई स्कार्पियो कार का नंबर होने के बाद भी मालिक की जानकारी लेने में पुलिस असफल रही है।
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फिलहाल यह मामला अपराध संख्या शून्य पर लिखा गया है। इससे साफ  है कि पुलिस इस मामले को क्षेत्राधिकार का विवाद बताकर रेलवे की सुरक्षा एजेंसी को स्थानांतरित करने के मूड में है। विवेचक के अनुसार आरपीएफ  प्रभारी ने अपने यहां चोरी की घटना से इनकार किया है। इससे मामला और पेचीदा हो गया है।

दो साल पहले इसी तरह बरामद हुआ था चावल
सोमवार को रोजा पुलिस द्वारा बरामद किए गए 21 बोरा चावल की तर्ज पर पुलिस ने दिसंबर 2012 में जमुका गांव से 102 बोरा चावल बरामद किया था। इसमें भी अभी तक पुलिस को माल के असली मालिक का पता नहीं लग सका है। बरामद बोरों पर भी इसी तरह का एफसीआई का मार्का लगा था। चर्चा है कि यह चावल भी रेलवे से चुराया गया था। रेलवे की दोषपूर्ण व्यवस्था और आरपीएफ  की जवाबदेही फिक्स न होने के कारण रेलवे संपत्ति की चोरी का ग्राफ  बड़ा है। इसका लाभ बदमाश और आरपीएफ कर्मी धड़ल्ले से उठा रहे हैं।

बरामद चावल थाना परिसर में बने बंदरों का आहार
दिसंबर 2012 को जमुका गांव से बरामद 102 बोरा चावल और सोमवार को पुलिस द्वारा बरामद किए गए 21 बोरी चावल का कोई मालिक न होने के कारण यह चावल अब थाना परिसर में खुले स्थान पर रखा गया है, जो इन दिनों बंदरों और अन्य पक्षियों का आहार बना हुआ है। यद्यपि बरामद चावल केस प्रापर्टी है और पुलिस अभिरक्षा में है, लेकिन इनको सुरक्षित रखने में पुलिस नाकाम रही है। इस कारण बंदरों के समूह सुबह से शाम तक इन चावलों के बोरों के पास डेरा जमाकर अपना पेट भरते रहते हैं।
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