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रिमझिम बारिश से लोग हुए सराबोर

Tue, 30 Jun 2015 12:14 AM IST
शाहजहांपुर।
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रविवार रात से शुरू हुई रिमझिम बारिश के रूप में बरसी राहत सोमवार शाम तक जारी रही। बारिश होने से मौसम सुहावना हो गया तो मानसून की रिमझिम बारिश से लोग सराबोर नजर आए। सड़कों पर युवक युवतियां सड़कों पर बाइक से बारिश में भीगकर रिमझिम बारिश होने का मजा लेते नजर आए।
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रविवार रात से शुरू हुई बारिश से मौसम काफी अच्छा हो गया था। बारिश होने का क्रम सोमवार सुबह तक जारी रहा। सुबह कुछ देर के लिए बारिश बंद हुई तो लोगों ने घरों से निकलना चाहा। इसके कुछ देर बाद फिर से बारिश शुरू हो गई। दिन भर रुक-रुककर बारिश होने का क्रम जारी रहा। रिमझिम बारिश में जहां कुछ लोगों की जरूरी काम की वजह से भीगने को मजबूर होना पड़ा वहीं तमाम लोग बारिश का मजा लेने के लिए बारिश में भीगे नजर आए।

रोडवेज अब अड्डे सहित कई स्थानों पर भरा पानी
बारिश होने से रोडवेज बस अड्डे सहित शहर में तमाम स्थानों पर बारिश का पानी भर जाने से लोगों को परेशानी भी हुई। शहर में रेलवे स्टेशन के पास, अजीजगंज, हद्दफ, चमकनी, अंटा चौराहा, बहादुरगंज पचराहा, मोहम्मद जई, लोहारों वाला चौराहा आदि क्षेत्रों में पानी रुकने से कीचड़ हो गया। इससे लोगों को खासी परेशानी हुई।
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आज नहीं होगी बारिश
गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक एसएस यादव ने कहा कि दिन भर बारिश होने की वजह से अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री से लुढ़ककर 27.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं  न्यूनतम तापमान में कोई खास गिरावट नहीं हुई। उन्होंने कहा कि रविवार रात से लेकर सोमवार शाम तक पांच मिलीमीटर बारिश हुई। इसके साथ ही उन्होंने मंगलवार को बारिश होने की संभावना से इंकार किया।

धान के लिए पर्याप्त बारिश की जरूरत
जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय के अनुसार मानसून के शुरुआती दौर में अभी जिले में इतनी बारिश नहीं हुई कि धान की रोपाई तेजी पकड़ सके। हालांकि, रिमझिम फुहारों से कुम्हला रही गन्ना पेड़ी और बैंगन, टमाटर, कद्दू, तोरिया, खीरा आदि लता वर्गीय सब्जियां तेजी से बढ़वार लेंगी।
डीएओ पांडेय के अनुसार इस वर्ष 70 हजार हेक्टेयर में गन्ना और करीब आठ हजार हेक्टेयर में सब्जियां बोई गई हैं। धान की रोपाई 2.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में होनी है, लेकिन पिछले दो सीजन से लगातार नुकसान उठा रहे किसान इतने डरे-सहमे हैं कि धान की रोपाई में जल्दबाजी का खतरा मोल नहीं लेना चाहते। बीते खरीफ सीजन में कम बारिश से धान में नुकसान का सामना करने वाले किसानों को रबी सीजन में भारी वर्षा से इतना नुकसान हो गया कि ट्यूबवेल से सिंचाई पर आने वाली लागत को वहन करना उनके लिए संभव नहीं रहा।
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