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रिक्शा चालक बच्चों की जान से कर रहे खिलवाड़

Tue, 14 Jul 2015 09:03 PM IST
शाहजहांपुर।
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डीएम के आदेश के बावजूद खुले रिक्शों के संचालन पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। शहर सहित जिले भर में खुले रिक्शों पर 15 से 20 बच्चों को बैठाकर उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। खुले रिक्शों में काफी घेराव होने के साथ ही बच्चे लटके रहते हैं, जिससे उनके गिरकर घायल होने का खतरा बना रहता है।
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शहर के नामचीन कान्वेंट स्कूलों से लेकर अन्य कॉलेजों तक के तमाम छात्र-छात्राओं को स्कूल लाने और घर ले जाने के लिए रिक्शों का प्रयोग किया जाता है। एक रिक्शा पर क्षमता से अधिक छात्र-छात्राएं बैठाए जाने की वजह से उनकी जान का खतरा बना रहता था। इसी वजह से शासन से मिले निर्देशों के अनुक्रम में डीएम ने डीआईओएस और बीएसए के जरिए सभी स्कूल और कॉलेज संचालकों को खुले रिक्शों के संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल खुले दो सप्ताह गुजर चुके हैं, लेकिन अभी तक खुले रिक्शों पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। स्कूल प्रबंधन कवर्ड रिक्शों के संचालन की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शिक्षा अधिकारियों की ओर से मिल रही छूट का फायदा उठाते हुए स्कूल संचालक भी इस कार्य पर ध्यान नहीं देना चाहते हैं। इससे नन्हे-मुन्नों की जान के साथ खिलवाड़ लगातार हो रहा है। शहर के किसी भी तिराहे चौराहे पर स्कूल जाने और छुट्टी होने के वक्त ऐसे रिक्शों को देखा जा सकता है। स्कूलों की थोड़ा ध्यान देने से बच्चों को सुरक्षित स्कूल आने जाने का का किया जा सकता है।
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अभिभावकों को भी देना होगा ध्यान
अधिकांश अभिभावक बच्चों के लिए रिक्शा या स्कूली वाहन तय करने के बाद खुद को जिम्मेदारी से मुक्त मान लेते हैं। इससे बच्चों की जान का खतरा बना रहता है। अभिभावकों को खुद ध्यान होगा कि उनका बच्चा जिस रिक्शा या स्कूली वाहन से जा रहा है। वह सुरक्षा के मानकों को पूरा कर रहा है या नहीं। इसके साथ ही सप्ताह में कम से कम एक या दो बार वाहन संचालक से बातचीत जरूर कर लें।

खटारा वाहनों पर नहीं लग सकी रोक
सरकारी स्कूलों में संचालित हो रहे खटारा वाहनों पर रोक नहीं लग सकी है। तमाम स्कूल कालेजों में खटारा वैन और बसें बच्चों को ढोने का काम कर रही हैं, जबकि गत शैक्षिक सत्र में बंडा क्षेत्र के विद्यालय में एक छात्र की गिरकर मौत हो चुकी है। इसके बावजूद ऐसे वाहनों पर रोक नहीं लग पा रही है।

चढ़ाई वाले स्थानों पर रिक्शों से उतार देते हैं बच्चे
शहर में चढ़ाव और उतार वाले कई स्थानों पर रिक्शा चालक बच्चे अधिक होने की वजह से उन्हें उतार देते हैं। इससे बच्चे रिक्शा के पीछे दौड़ते हुए जाते हैं, जिससे सड़क पर किसी वाहन की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। टाउनहाल ओवरब्रिज के पास अक्सर बच्चे रिक्शा चालकों के पीछे दौड़ते हुए मिल जाएंगे। वहीं चमकनी करबला में मिस्टीक रेस्टोरेंट के साथ ही अन्य कई स्थानों पर रिक्शों के पीछे बच्चे दौड़ते हुए मिल जाएंगे।

Òजिले के जिन क्षेत्रों में खुले रिक्शों का संचालन किया जा रहा है। वहां पर जांच कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रबंधन कमेटी के साथ क्षेत्रीय अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।Ó
- राकेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

Òगैस से संचालित होने वाले स्कूली वाहनों पर तो पूरी तरह से लगाम कसा जा चुका है। खटारा वाहनों और ओवरलोडिंग करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। यदि किसी अभिभावक या अन्य किसी को गैस से स्कूली वाहन संचालित होने की सूचना मिलती है तो वह कार्यालय में सूचना दे सकता है।Ó
-एके मिश्रा, एआरटीओ (प्रवर्तन)

स्कूल बस से ढो रही क्षमता से डेढ़ गुने बच्चे
शाहजहांपुर। स्कूल प्रबंधन की ओर से संचालित बसों में क्षमता से डेढ़ गुने और दो गुने छात्र-छात्राएं ढोए जा रहे हैं। इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अन्वेषण संगठन के मंडल अध्यक्ष मुकीम हुसैन ने डीएम को शिकायती पत्र दिया। कहा कि जलालाबाद क्षेत्र में संचालित एक स्कूल प्रबंधक के ऐसे रवैए से बच्चों को शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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