हर साल की तरह इस बार भी बारिश का दौर परवान चढ़ने के साथ जिले से होकर बहने वाली नदियां भी उफान पर आने लगी हैं। इसके साथ ही प्रशासन भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य के लिए सतर्कता बरते जाने के दावे करने लगा है, लेकिन जलालाबाद और तिलहर क्षेत्र में गंगा-रामगंगा, बहगुल, सोंत आदि नदियों के किनारे बसे गांवों पर बाढ़ से जलमग्न होने का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन वहां के लिए गठित अधिकांश बाढ़ चौकियां कहीं अस्तित्व में नहीं दिख रहीं।
इस वर्ष बाढ़ राहत और बचाव को बनाई गई कार्य योजना में 72 गांवों में बाढ़ चौकियां तय की गईं। इसी आधार पर प्रशासन भी सभी बाढ़ चौकियां खुलने का दावा कर रहा है। चौकियों पर राजस्व विभाग के लेखपालों, एएनएम, बीएचडब्ल्यू, सिंचाई विभाग और पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी भी तय हो गई है, लेकिन कर्मचारी वहां जाने की जहमत नहीं उठा रहे। स्वास्थ्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की सारी दवाएं अभी नजदीकी सरकारी अस्पतालों में स्टोर हैं।
जलालाबाद क्षेत्र के कई
गांवों से चौकियां गायब
जलालाबाद। नदियों के जलस्तर में हो रही वृद्धि को देखते हुये प्रशासन ने क्षेत्र की सभी 24 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर वहां राजस्व, ब्लाक, स्वास्थ्य तथा पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों की तैनाती का दावा करने के साथ ही तहसील पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया है जिसका नंबर 05843- 255024 है। आपदा प्रभारी के अनुसार बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को स्थिति पर नजर रखते हुये रिपोर्ट भेजते रहने के निर्देश दिये गये हैं, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत हैं क्योंकि बाढ़ प्रभावित इलाके में बसे कई गांवों में बचाव चौकियां नजर नहीं आ रहीं।
हर साल बाढ़ग्रस्त रहने वाले खंडहर, कोला तथा गोरा महुआ गाड आदि गांवों में बाढ़ चौकियों का जायजा लिए जाने पर ग्रामीणों ने उल्टा सवाल किया कि चौकियां खोली कहां गई हैं। ग्रामीणों के अनुसार लेखपाल के अलावा उनके गांव में अन्य कोई कर्मचारी बाढ़ संबंधी जानकारी लेने नहीं आया। लोगों का कहना है बाढ़ चौकियों की स्थापना केवल कागजों में कर प्रशासन द्वारा खानापूर्ति कर दी गई है।
घरों में वक्त गुजार रहे बाढ़ चौकियों के कर्मचारी
तिलहर। बाढ़ की आशंका देखते तहसील प्रशासन ने बाढ़ संभावित इलाकों में 31 चौकियां स्थापित करने का दावा किया है। नियमत: चौकियों पर नियुक्त किए गए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को तैनाती स्थल पर ही रहकर नदी के जल स्तर पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन संबंधित कर्मचारी अपने घरों पर रहकर वक्त गुजार रहे हैं। गर्रा की बाढ़ से हर साल जूझने वाले बिरसिंहपुर, रटी रटा, अजमाबाद, भटपुरा, हजरतपुर, ढकिया रघा आदि गांवों में बाढ़ चौकियां नहीं खुल पाई हैं।
तहसीलदार लालता प्रसाद तिवारी ने बताया कि बाढ़ चौकियों के तिरपाल, टार्च और अन्य सामग्री जिला मुख्यालय से आज ही प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि तहसील में नियंत्रण कक्ष में प्रभारी के तौर पर राजकमल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिये आठ नावें और दो बोट को तैयार किया गया है। इसकी देखरेख के लिये चार लेखपाल और एक को सुपरवाईजर के रूप में तैनात किया गया है। 9454415885 पर बाढ़ से संबंधित सूचना देने की व्यवस्था की गई है।
53 लाख रुपये बाढ़ राहत को उपलब्ध
दैवी आपदा प्रकोष्ठ के प्रभारी एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ से राहत और बचाव के लिए दैवी आपदा मद मेें शासन से 53 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष जिले के 11 गांव बाढ़ की चपेट में आए जिनमें विभिन्न कार्यों पर करीब 16 लाख रुपये व्यय हुए थे। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होते ही सभी बाढ़ चौकियां एक्टिव हो जाएंगी।