पुवायां। तीन सहकारी समितियों मेें 59.92 लाख रुपये के गबन के मामले में तत्कालीन सचिव और जिला सहकारी बैंक के दो तत्कालीन शाखा प्रबंधकों के खिलाफ थाना खुटार में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोपी सचिव इन दिनों जेल में बंद है। उस पर उर्वरक के स्टॉक और किसानों के ऋण खातों में गोलमाल करने का आरोप है।
अपर जिला सहकारी अधिकारी पुवायां रामकेवल वर्मा और सहायक विकास अधिकारी सहकारिता राजेश कुमार वर्मा की ओर से संयुक्त रूप से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा गया है कि साधन सहकारी समिति पुनौती खुर्द, साधन सहकारी समिति नरौठा हंसराम और किसान सेवा सहकारी समिति मलिका के सदस्यों की ओर से विपिन कुमार तिवारी तत्कालीन कैडर सचिव (वर्तमान में निलंबित) के खिलाफ किसानों के नाम से फर्जी कर्ज वितरण की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इस पर कार्यालय सहायक आयुक्त और सहायक निबंधक सहकारिता शाहजहांपुर, कार्यालय जिला प्रशासनिक कमेटी शाहजहांपुर के आदेश पर 26 फरवरी 2020 को सात सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। जांच कमेटी ने प्रथम दृष्टया प्रकाश में आए गबन/वित्तीय अनियमितता की अनंतिम जांच आख्या 30 अप्रैल 2020 को प्रस्तुत की थी, आगे की जांच अभी जारी है। सहायक आयुक्त और सहायक निबंधक सहकारिता ने एक मई को उक्त तीनों समितियों में तत्कालीन कैडर सचिव विपिन कुमार तिवारी के कार्यकाल में की गई 59,92,486 रुपये की राशि के मामले में रिपोर्ट दर्ज किए जाने के आदेश दिए थे।
एडीसीओ के अनुसार विपिन कुमार तिवारी ने साधन सहकारी समिति नरौठा हसंराम में 8,26,198, किसान सेवा सहकारी समिति मलिका में 45,16,473 रुपये और साधन सहकारी समिति पुनौती खुर्द में 6,49,815 रुपये, कुल 59,92,486 रुपये का गबन/अपहरण किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विपिन कुमार तिवारी पर वर्ष 2014-15, 2015-16, 2016-17 में कर्ज पर फर्जी उर्वरक वितरण दर्शाकर किए गए गबन/अपहरण को छिपाने के लिये फर्जी चेकों (उर्वरक वितरण रजिस्टर से भिन्न) को जिला सहकारी बैंक लिमिटेड शाखा खुटार में समायोजन करने में तत्कालीन शाखा प्रबंधक अजय प्रताप सिंह, तत्कालीन शाखा प्रबंधक (वर्तमान में सेवानिवृत्त) बैंक शाखा खुटार में कार्यरत पटल सहायक की संलिप्तता भी जांच में पाई गई है। खुटार के एडीओ कोऑरेटिव राजेश कुमार वर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराने की पुष्टि की है।
इन मदों में गबन करने का आरोप
- साधन सहकारी समिति लि. नरौठा हंसराम में कर्ज पर फर्जी उर्वरक वितरण दर्शाकर 3,27,848 रुपये।
- पीसीएफ से 24 नवंबर 2017 को आपूर्ति किए गए 15 मी. टन एनपीके उर्वरक को समिति नरौठा हंसराम के उर्वरक स्टाक रजिस्टर में दर्ज न कर अभिलेखो में कूटरचना करते हुए उर्वरक की कालाबाजारी करके 3,07,500 रुपये।
- साधन सहकारी समिति नरौठा हंसराम के सदस्य हरजीत सिंह से 97,820 रुपये वसूल कर मात्र दस हजार रुपये जमा कर 87,820 का गबन।
- समिति सदस्य भगवान दास से 99,030 रुपये की वसूली कर मात्र दस हजार रुपये जमा कर 89,030 का गबन।
- किसान सेवा सहकारी समिति मलिका में समिति सदस्यों को अंश ख ऋण पर फर्जी उर्वरक वितरण दर्शाकर 45,16,473 रुपये के स्टाक का गबन।
- 17 फरवरी 2020 को सचिव हरेंद्र प्रताप सिंह को चार्ज देते समय समिति में उपलब्ध उर्वरक स्टाक 7,39,920 रुपये केसापेक्ष 90,105 का स्टाक देकर 6,49,815 रुपये का गबन।
अभिलेख भी गायब करने का आरोप
रिपोर्ट में विपिन तिवारी पर उवर्रक वितरण रजिस्टर, उर्वरक स्टाक रजिस्टर, कई वर्षों की नकद बही, कई वर्षों की दैनिक बही, उर्वरक लाइसेंस, उर्वरक चालान, कैश रसीद, वाउचर फाइल आदि अभिलेख नहीं सौंपने का भी आरोप है।
पहले भी दर्ज हुई थीं रिपोर्ट
सहकारी समितियों में भारी घोटाले का मामला फरवरी 2020 में अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। खबरें प्रकाशित होने के बाद सचिव विपिन तिवारी को बंडा पुलिस ने घोटाले के मामले में दर्ज एक रिपोर्ट में जेल भेजा था। निलंबित सचिव विपिन तिवारी पर पहली रिपोर्ट चार अक्तूबर 2012 को पीसीएफ के जिला प्रबंधक ऋषिकेश यादव ने दर्ज कराई थी। इस रिपोर्ट में विपिन कुमार तिवारी सहित नौ लोग नामजद थे। रिपोर्ट में मूल्य समर्थन योजना के तहत एक अप्रैल से 30 जून तक पीसीएफ केद्रों के माध्यम से खरीदे गए लगभग 1825 क्विंटल गेहूं को एसडब्ल्यूसी पुवायां के प्रबंधक तिलकराज ने संबंधित प्रभारियों के क्लेम करने पर देने से इनकार कर दिया। उक्त गेहूं की कीमत 28,31,086 रुपये बनती है। आरोप था कि गेहूं का गबन एसडब्ल्यूसी पुवायां के प्रभारी और संबंधित केंद्र प्रभारी और ठेकेदार ने कर लिया है। इस मामले में विवेचक एसआई रंजीत कुमार ने 11 पर्चे काटने के बाद 27 मई 2013 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। दूसरी रिपोर्ट 22 जून 2019 को बंडा थाने में तत्कालीन डिप्टी आरएमओ जेया अहमद करीम ने दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप था पीसीएफ सहकारिता ने गांव देवकली में क्रय केंद्र स्थापित किया था। क्रय केंद्र पर प्रभारी आकाश पांडे और आंकिक विपिन तिवारी की तैनाती की गई थी। इस सेंटर पर फर्जी किसानों के नाम से बिचौलियों के खातो में 31 लाख रुपये का भुगतान भेजा गया है। इस मामले में जिला सहकारी बैंक बंडा के प्रबंधक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी। इस मामले में मार्च में विपिन तिवारी को जेल भेजा गया था। विपिन तिवारी की अभी जमानत नहीं हुई है।