रामाश्रम सत्संग मथुरा के उप केंद्र बाबा विश्वनाथ यात्री निवास में अखिल भारतीय आंतरिक सत्संग शुरू हो गया। सत्संग में देश के अनेक जनपदों से सैकड़ों सत्संगी घरवालों के साथ आए हैं। इस अवसर पर गृहस्थ संत कृष्ण कांत शर्मा (टूंडला वाले) ने सत्संगियों को गुरु की महिमा समझाते हुए ध्यान-साधना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
दूर-दूर से आए महिलाओं-पुरुषों से खचाखच भरे पंडाल में श्री शर्मा ने कहा कि गुरु से मिलने का रास्ता बताना और गुरु से मिलवाना कोई आसान काम नहीं है। ये दोनों काम असंभव हैं, लेकिन सद्गुरु की कृपा जिस पर हो जाए, तो वह दोनों काम आसानी से कर सकता है। सद्गुरु ही ईश्वर से साक्षात्कार कराने का मार्ग बता सकता है और उस रास्ते पर चलना सिखा सकता है। इसलिए गुरु पर पूर्ण विश्वास करते हुए उसके चरणों में सर्वस्व समर्पित कर देना चाहिए। सद्गुरु ही जीवन से अज्ञानता रूपी अंधकार दूर कर ज्ञान के प्रकाश से हमारा अंत:करण प्रकाशित कर सकता है।
इससे पूर्व सम्मेलन के कर्ताधर्ता लाला रघुवर दयाल अग्रवाल ने गुरु महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि हम धन, वैभव, प्रतिष्ठा, अहंकार को छोड़कर सद्गुरु की ओर बढ़ते जाएंगे, तो हम अपना संसार और अध्यात्म दोनों संवार लेंगे। श्याम मोहन टंडन ने कहा कि संतों की कृपा से ही हमारी परेशानियां दूर होती हैं। उन्हीं की कृपा से जीवन जीने लायक बन पाता है। गुरू के उपदेशों को सुनने, गुनने और जीवन में उतारने से हमारे अंदर ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए जीवन का सद्गुरु का पदार्पण बहुत आवश्यक है। इस अवसर पर अहमदाबाद से आए राजेंद्र गुप्त आदि ने भी विचार व्यक्त किए।