वीर शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस पर रविवार को सिख समाज सेवा संगठन ने उनका भावपूर्ण स्मरण किया। अशफाकनगर चौराहे के पास आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके उन्हें भावपूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष राजू बग्गा ने कहा कि उधम सिंह का बचपन बहुत ही कष्टों में बीता था। उधम सिंह में एक परिवर्तन आया जब वे अपने क्षेत्र में होने वाली अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ होने वाली रैलियों में हिस्सा लेने लगे। 13 अप्रैल 1999 को गांधी जी के द्वारा भारत में लागू रौलेट एक्ट के विरोध में जालियां वाला बाग में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था। उसमें उधम सिंह भी मौजूद रहे। इसी दौरान जनरल डायर ने यहां मौजूद हजारों लोगों पर गोलियां चलवा दीं। इसमें सैकड़ों लोग मारे गए। इस नरसंहार को उधम सिंह सहन नहीं कर सके। उन्होंने ठान ली की एक दिन जनरल डायर का अंत कर देंगे। उन्होंने लंदन के कैम्सटन हाल में अफसरों की भरी सभा में जनरल डायर को गोलियों से भून डाला और अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली। इसके बाद उधम सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उधम सिंह को 31 जुलाई 1940 को फांसी दे दी गई। श्री बग्गा ने कहा कि वीर उधम सिंह की शहादत कभी भुलाई नहीं जा सकती है। कार्यक्रम में दलीप सिंह, रमनदीप सिंह, यशपाल सिंह, प्रखर शर्मा, तरुण शर्मा, गंभीर, सर्वेश, रमेश यादव, सहजदीप सिंह, बलजीत सिंह आदि मौजूद रहे।