पॉवर कारपोरेशन मुख्यालय द्वारा शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं को रियायती मूल्य पर एलईडी बल्ब सुलभ कराए जाने का शहर के बिजली नेटवर्क पर सकारात्मक असर दिखने लगा है। पिछले एक माह के दौरान शहरी क्षेत्र में लगभग 50 हजार एलईडी बल्बों की बिक्री हुई है और इसके साथ ही बिजली खपत करीब 20 फीसदी घट गई है। विभाग का लक्ष्य है कि शहर के सभी 70 हजार उपभोक्ता परिसरों तक एलईडी बल्ब पहुंचा दिए जाएं। हालांकि, बिजली की मांग कम होने के बावजूद रोजाना नौ घंटे की नियमित बिजली कटौती में कोई रियायत नहीं मिल रही।
शहर का बिजली नेटवर्क करीब 70 हजार घरेलू और वाणिज्यिक बिजली कनेक्शनों का लोड संभाले है। इन कनेक्शनों से बीते अक्तूबर माह तक करीब दो करोड़ यूनिट बिजली रोजाना खर्च हो रही थी। सप्लाई की तुलना में डिमांड अधिक होने से बिजली नेटवर्क पर जहां-तहां लाइन फाल्ट भी विभाग के लिए समस्या बने थे। इसी बीच, दिवाली से पहले नवंबर माह के पहले सप्ताह से नेटवर्क पर बिजली खपत और लोड घटाने के लिए उपभोक्ताओं को 100 रुपये के रियायती मूल्य पर एलईडी बल्ब उपलब्ध कराने का अभियान छेड़ दिया गया।
चूंकि, एलईडी का वितरण रोशनी के त्योहार दिवाली से ठीक पहले छेड़ा गया। इसलिए उपभोक्ताओं में भी उन्हें लेने को होड़ लग गई। दरअसल, उपभोक्ताओं को बताया गया कि तीन साल की वारंटी वाले एलईडी बल्ब नवंबर के अंत तक रियायती मूल्य पर मिलने बंद हो जाएंगे। चूंकि, खुले बाजार में वही एलईडी 250 से 300 रुपये के आसपास बिक रही है। इसलिए विभाग के कैनौपी वाले कैंपों पर लोग उमड़ते रहे। भीड़ कम होती नहीं देख विभाग ने भी इसके वितरण की अवधि फिलहाल अनिश्चितकाल को बढ़ा दी है।
इस तरह बिजली बचत
में मददगार है एलईडी
पॉवर कारपोरेशन के अभियंताओं के अनुसार सात वाट का एक एलईडी बल्ब 20 वाट के कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप अर्थात सीएफएल और 100 वाट के टंगस्टन फिलामेंट वाले पारंपरिक बल्बों के बराबर रोशनी देते हैं। आशय यह कि 100 वाट का साधारण बल्ब एक घंटे में जितनी ऊर्जा खपत करता है, उतनी बिजली एलईडी को 14 घंटे इस्तेमाल करने पर खर्च होती है। इससे स्पष्ट है कि एलईडी बल्ब पॉवर नेटवर्क को ओवरलोडिंग की समस्या से बचाने के साथ उपभोक्ताओं के लिए भी किफायती साबित हो रहे हैं।
लाइन स्टाफ को एलईडी
से मिल रहा सुकून
शहर के जिन इलाकों में एलईडी बल्ब ज्यादा बिके हैं, वहां का लाइन स्टाफ पहले से ज्यादा सुकून महसूस कर रहा है। राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र पांडेय के अनुसार शहरी नेटवर्क पर 30 लाख यूनिट बिजली की खपत प्रतिदिन कम हो जाने से एचटी और एलटी लाइनों पर कुल विद्युत भार 25 से 30 प्रतिशत घट गया है। इसी वजह से ट्रांसफार्मर हीटअप होकर जलने के मामले में एकाएक कम हो गए हैं।
सभी घरों तक एलईडी पहुंचाना लक्ष्य
शहर में कनेक्शनों के सापेक्ष लगभग एक लाख एलईडी बल्ब अब तक बिक जाने चाहिए। जो उपभोक्ता एलईडी खरीद ले गए हैं, उनमें से अधिकांश पुराने बल्ब और सीएफएल फ्यूज होने का इंतजार कर रहे हैं। यदि सभी उपभोक्ता घरों-दुकानों के प्रकाश बिंदुओं पर एलईडी लगा दें तो शहर में बिजली की दैनिक खपत में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट आ जाएगी। उपभोक्ताओं को स्टॉक रहने तक सस्ती दरों पर एलईडी बल्ब उपलब्ध कराए जाते रहेंगे।
-एसके श्रीवास्तव, एक्सईएन सिटी, पॉवर कारपोरेशन