त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसमें युवा से लेकर बुजुर्ग और महिलाएं भी ग्राम पंचायत से लेकर क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर की सीटों के लिए मैदान में बाजी मारने की जुगत लगा रही हैं, लेकिन इन सबके बीच राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से वेबसाइट पर जारी गत वर्षों के परिणामों के आंकड़े से रोचक तस्वीर उभरकर सामने आई है। जिन युवाओं पर हर राजनीतिक दल का फोकस इन दिनों है, उसी में इस चुनाव में सबसे निचले पायदान वाले ग्राम प्रधान पद के लिए दांव आजमाने में रुचि लगातार घटी है। वर्ष 1995 की तुलना में गत वर्ष 2010 में 21 से 35 वर्ष के आयु वर्ग वाले निर्वाचित प्रधानों की संख्या में करीब 9.84 फीसदी तक कमी दर्ज हुई।
वर्ष 1995 में पूरे प्रदेश में निर्वाचित प्रधानों में से 35 वर्ष तक की आयु वालों की संख्या 42.73 फीसदी थी, जबकि वर्ष 2005 में यह लुढ़ककर 39.67 फीसदी और वर्ष 2010 में 32.89 फीसदी ही रह गई। इसके उलट 36 से 50 वर्ष तक की आयु वाले निर्वाचित प्रधानों की संख्या में इसी दौरान क्रमश: बढ़ोत्तरी जारी रही और 15 वर्ष के अंतराल में करीब 9.23 फीसदी तक बढ़ी। गत बार यानी वर्ष 2010 में प्रदेश में कुल 51892 प्रधान चुने गए, जिनमें से इस आयु वर्ग वालों की संख्या 50.88 फीसदी रही, जो कि वर्ष 1995 में 41.65 रही थी।
इसी क्रम में बरेली मंडल में तस्वीर थोड़ी अलग है। प्रदेश स्तरीय आंकड़े की तुलना में यहां के चारों जिलों में युवा प्रधानों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। गत बार पंचायत निर्वाचन में सबसे ज्यादा युवा 36.29 फीसदी बदायूं जिले से निर्वाचित हुए थे। इस दौड़ में शाहजहांपुर 34.81 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि बरेली तीसरे और पीलीभीत चौथे स्थान पर था।
निर्वाचित प्रधानों के उम्र के लिहाज से आंकड़े प्रतिशत में
वर्ष 21 से 35 36 से 50 50 से अधिक
1995 42.73 41.65 15.62
2005 39.67 43.21 17.10
2010 32.89 50.88 16.21
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खीरी और बरेली मंडल में वर्ष 2010 में निर्वाचित प्रधानों के आयु वर्ग वाले आंकड़े
बरेली 34.65 52.23 13.10
पीलीभीत 31.21 54.25 14.52
शाहजहांपुर 34.81 47.28 17.89
बदायूं 36.29 48.92 14.78
खीरी 35.14 50.95 13.89
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