तिलहर में आयोजित मुशायरे में गजल सुनाते शायर। संवाद
तिलहर। मोहल्ला घेर चौबा स्थित गुलशन जहां गुलशन के आवास पर बज्म-ए-अरबाब-ए-सुखन के तत्वावधान में महफिल-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। शायरों ने गजलें सुनाकर वाहवाही लूटी। शकील तिलहरी की अध्यक्षता और मास्टर शाहिद अली के संचालन में कार्यक्रम की शुरुआत मसूद हुसैन ने नात-ए-पाक से की।
मुशायरा का आगाज करते हुए शकील तिलहरी ने सुनाया कि ढूंढ़ रहे हैं हम कब से, अपनों में ही अपनापन। हमीद खिजर ने कहा कि बुझ न जाए कहीं चराग-ए-हयात मसअला है ये उनकी आमद तक। खलीक शौक ने फरमाया कि हंसा कर मुझे फिर रुलाने लगा है मिरा जर्फ वो आजमाने लगा है। हसीब चमन ने कहा कि अजब इंसानियत का रूप देखा कि पेशा रहबरों का रहजनी है। इस तरह से मुनीब शाहजहांपुरी, कासिम अख्तर वारसी, गुलशन जहां गुलशन, साजिद सफदर, वहीद तिलहरी, रेहान ताबिश ने भी गजलें सुनाईं।
संस्था के सदस्य रहे जहीर अहमद उर्फ नन्हा भाई को मौन श्रद्धांजलि दी गई। मुशायरे में बशीरउद्दीन, आमिर मियां, सैय्यद मतलूब अली, बाबू अली, जैनुल फैसल आदि मौजूद रहे।