शाहजहांपुर में श्रीराम कथा सुनाते संत विजय कौशल। स्रोत: आयोजक
- फोटो : भेड़िये के हमले का शिकार बनी जाह्नवी।
शाहजहांपुर। मंगलमय परिवार की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के पांचवें दिन राम वनवास और दशरथ शोक का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक विजय कौशल ने कहा कि अयोध्या का राम वनवास वह दिन केवल राजनीति का निर्णय नहीं था, बल्कि धर्म, त्याग और मर्यादा का सबसे ऊंचा पर्व था।
कैंट स्थित रामलीला मैदान पर संत विजय कौशल ने कहा कि जिस राम के नाम से अयोध्या उल्लासित रहती थी। उसी राम को राजमहल छोड़कर वन की ओर जाना पड़ा और यह अकेले राम का नहीं, पूरी अयोध्या का वनवास था। उन्होंने कहा कि जब कैकेयी ने दो वरदान मांगे, तब संसार को यह समझ में आया कि मोह कितना भयंकर होता है।
उन्होंने कहा कि राम ने ताज नहीं, त्याग चुना। वे सत्ता के लिए नहीं, सत्य के लिए पैदा हुए थे। उन्होंने भावुक होकर चौपाई पढ़ी-राम जात सुनि नगर जन दीन्हीं, अजहुं तैसी न अयोध्या कीन्हीं। यह सुनकर पंडाल में सन्नाटा छा गया।
वैदिक आचार्य सुबोध शुक्ला, अंकुर शुक्ल, बृजराजदास, वरुण शर्मा, विनीत शुक्ला और आलोक त्रिवेदी ने कथा पूर्व पूजन-अर्चन कराया। मुख्य अतिथि दीपक शर्मा और राजीव तोमर रहे। कथा में राजेश अवस्थी, नगर आयुक्त डॉ.बिपिन मिश्रा, डीपीएस राठौर, सोनिया राठौर, अखिलेश दीक्षित आदि मौजूद रहे।