खिरनीबाग मैदान में चल रही नगर रामलीला का रावण वध को साथ समापन हो गया। अंतिम दिन मंच दशहरा देखने के लिए यहां शहर उमड़ पड़ा। हजारों की भीड़ ने देर रात तक रावण फुंकने की प्रतीक्षा की। मंच पर अहिरावण वध और नारांतक वध की लीला के बाद जैसे ही राम-रावण युद्ध आरंभ हुआ, वैसेेे ही रामलीला देखने के लिए उमड़े दर्शकों ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान आदि की जय-जयकार करनी आरंभ कर दी। गगनभेदी जयकारों के बीच राम की सेना रावण पर आक्रामक हो उठी। दोनों ओर से बाणों से वर्षा होने लगी। दर्शकों में उत्साह चरम पर था। कभी मंच पर तो कभी मंच के सामने मैदान पर राम-रावण युद्ध देखकर बच्चे, युवा, बूढ़े सभी रोमांचित होते रहे। दर्शकों ने आतिशबाजी का भी आनंद लिया।
रावण का वध होते ही मैदान में खड़े विशालकाय रावण और कुंभकरण के पुतलों की लाइट काट दी गई और फिर विभीषण ने दोनों पुतलों को आग लगा दी। देखते ही देखते एक-एक कर दोनों पुतले धू-धू कर जलने लगे। पुतलों से पटाखों की आवाज से दिशाएं गूंज उठीं। पुतलों में आग लगने के बाद वहां मौजूद लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हुए एक-दूसरे को विजयदशमी की बधाई दी और अपने से बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।
राम ने कुंभकरण और लक्ष्मण ने मेघनाद का किया वध
शाहजहांपुर। ओसीएफ रामलीला में बृहस्पतिवार को श्रीराम की शैलजा विनय के साथ शुरुआत हुई। रामलीला देखने के लिए हजारों की भीड़ जुटी। वहीं, मेला प्रदर्शनी देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने खेेल-तमाशों और झूलों का आनंद लिया।
रामलीला में दिखाया गया कि श्रीराम नेेे घोर घमासान के बाद कुंभकरण का वध कर दिया। इसके बाद मेघनाद और लक्ष्मण का घमासान युद्ध हुआ। युद्ध शांत होने पर मेघनाद की पत्नी सुलोचना उसे बहुत समझाती है, लेकिन वह नहीं मानता और अगले ही दिन फिर युद्ध के लिए निकल पड़ता है। इस युद्ध में मेघनाद को वीरगति प्राप्त होती है। सुलोचना राम के पास जाकर पति का सिर मांगती है और सती हो जाती है।
रामलीला में आज
- नगर रामलीला में श्रीराम राज्याभिषेक शोभायात्रा और शनिवार की सुबह करीब सात बजे चौक में राम-भरत मिलाप।
- ओसीएफ रामलीला में श्रीराम-रावण युद्ध और रावण वध लीलाओं का मंचन, आतिशबाजी का प्रदर्शन।