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ठंडे बस्ते में मारूती स्पेशल के डिरेलमेंट की जांच

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रोजा-शाहजहांपुर। अटसलिया फाटक के पास मारुति स्पेशल के डिरेल होने की जांच ठंडे बस्ते में पड़ती नजर आ रही है। घटना के 25 दिन बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई है, जबकि एक सप्ताह में रिपोर्ट मुरादाबाद भेजने के निर्देश दिए गए थे।
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रोजा में अटसलिया फाटक के पास 12 दिसंबर को मारुति स्पेशल के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इस घटना ने पूरे मंडल में हड़कंप मचा दिया था। घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों ने देर रात तक ट्रैक पर काम करके रेल यातायात को सुचारु कर दिया। लेकिन डिरेल होने वाली मारुति स्पेशल की बोगियां अब भी लखनऊ में चारबाग स्थित प्रशिक्षणशाला में खड़ी हैं। जिनको डिरेलमेंट होने के कारणों की जांच के लिए रखा गया है। इतनी बड़ी घटना होने के बाद मामले की जांच होना स्वाभाविक है, तो उसके लिए रेलवे के ए ग्रेड अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम भी बनाई गई और एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट मंडल कार्यालय मुरादाबाद को भेजने के निर्देश दिए गए। अब 25 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस मामले में जांच कहां तक पहुंची और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं है।
प्रथम दृष्टया सीएंडडब्ल्यू पाए थे दोषी
- डिरेल होने पर मामले की जांच के लिए तत्कालीन एडीआरएम अश्वनी कुमार खुद घटना स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने घटना के कारणों और उसके लिए दोषी अधिकारियों की एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार कराई थी। जिसमें प्रथम दृष्टया सीएंडडब्ल्यू को दोषी माना गया। इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए सीनियर सीएस टू दीपक मेहरा समेत ए ग्रेड अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया।
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बदल गए एडीआरएम
- मामले की जांच पूरी होने में देरी के लिए एडीआरएम अश्वनी कुमार का तबादला होना बताया गया। उनकी जगह पर मानसिंह मीणा को चार्ज दिया गया है। जिन्होंने मारुति स्पेशल के डिरेल होने की पूरी जानकारी न होने और जांच चलने की बात कही थी, पर अब जांच का कहां तक पहुंची यह बताने वाला ही कोई नहीं है।
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