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रबी फसलों की उत्पादकता घटा देगी जनवरी की गर्मी!

Fri, 08 Jan 2016 08:14 PM IST
शाहजहांपुर।
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जाड़ों में हमेशा गुनगुनी गर्माहट का सुखद अहसास कराने वाली धूप जनवरी में तपिश का अहसास सिर्फ हमें-आपको नहीं, बल्कि फसलों को भी करा रही है। जनवरी की गर्मी फसलों को बेवक्त जवान कर रही है। गेहूं के पौधे बढ़ नहीं पाए कि बालियां झांकने लगी हैं। इसी तरह सरसों भी वक्त से पहले फूलने लगी है। थर्मामीटर का पारा सामान्य से पांच डिग्री ऊपर चढ़ा है, जिससे रबी उत्पादकता घटने की आशंका बढ़ गई है। उधर, मौसम आधारित फसल बीमा योजना से अधिकांश किसानों को कुछ हासिल होने वाला नहीं।
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जिले में विभिन्न श्रेणियों के करीब साढ़े चार लाख किसान हैं। इनमें अधिकांश लघु और मध्यम जोत श्रेणी के किसान हैं। रबी सीजन में किसानों ने 3.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, राई, सरसों, चना, मटर, मसूर आदि फसलें बोई हैं। यही नहीं, 70000 हेक्टेयर में गन्ना और आठ हजार हेक्टेयर में आलू की खेती की गई है। इन सभी फसलों पर सामान्य से अधिक तापमान का असर दिखने लगा है। गेहूं में बालियां दो सप्ताह पहले देखी जा चुकी हैं, अब सरसों की हरियाली के बीच पीले फूल भी उभरने लगे हैं, जबकि अभी पौधे पर्याप्त बढ़वार नहीं ले पाए हैं।  

20 डिग्री से अधिक तापमान से नुकसान
गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार गत एक सप्ताह से तापमान सामान्य से पांच-छह डिग्री अधिक रिकार्ड किया जा रहा है। दिन में अधिकतम तापमान 19-20 डिग्री होना चाहिए, लेकिन बृहस्पतिवार को 23.8 डिग्री रिकार्ड किया गया। उन्होंने कहा कि तापमान इतना रहे तो गनीमत, वरना पारा और चढ़ने पर फसली नुकसान भी बढ़ जाएगा।
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फसलों पर गर्मी की इस तरह पड़ेगी मार
कृषि विज्ञान केंद्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. केएम सिंह के अनुसार बढ़े हुए तापमान का असर गेहूं की फसल पर पड़ना तय है। दलहन-तिलहन को ज्यादा नुकसान नहीं होगा, लेकिन आर्द्रता में कमी से फसलों को नमी से मिलने वाले पानी की पूर्ति कम होगी। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुरूप जनवरी के दूसरे सप्ताह में बारिश हुई तो कई फसलों में कीट-रोग की आशंका बढ़ जाएगी। मौसम शुष्क होने पर आलू ओवरसाइज हो जाएगा और खेतों से निकासी तेज होने पर भंडारण की समस्या हो सकती है।

17 हजार किसान पा सकेंगे मौसम बीमा लाभ
मौसम आधारित फसल बीमा का लाभ जिले में बमुश्किल 17 हजार किसान हासिल कर पाएंगे। दरअसल, इस योजना से केवल उन्हीं किसानों को जोड़ा गया है, जिन्होंने विभिन्न मदों में कृषि ऋण ले रखे हैं। जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय के अनुसार योजना के तहत एक अक्तूबर से 30 अप्रैल तक सभी फसलें कवर होती हैं। प्रीमियम धनराशि 15 दिसंबर तक जमा करना अनिवार्य है। तापमान सामान्य से प्रत्येक एक डिग्री कम अथवा अधिक होने के अनुपात में बीमा क्लेम दिया जाता है। उन्होंने बताया कि तापमान के स्तर और अन्य परिस्थितियों के अनुसार गेहूं पर प्रति हेक्टेयर अधिकतम 53 हजार रुपये और न्यूनतम 21 हजार रुपये बीमा राशि देय है।
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