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पुवायां का खरबूजा उत्तराखंड तो खीरा पहुंचा दिल्ली

Fri, 05 May 2017 12:28 AM IST
हरिओम त्रिवेदी पुवायां। 
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kheera - फोटो : amar ujala
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खरबूजे के स्वाद ने उत्तराखंड के लोगों को बनाया मुरीद
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तीन सौ एकड़ से अधिक में हो रही खीरे और खरबूजे की खेती

पुवायां के खीरे नेे दिल्ली तक छलांग लगाई है तो यहां का खरबूजा उत्तराखंड तक के लोगों को अपने स्वाद और मिठास का मुरीद बना चुका है। खीरा दिल्ली जा रहा है, जबकि उत्तराखंड के व्यापारियों ने पुवायां आकर खरबूजे की सौदेबाजी शुरू कर दी है। 
पुवायां क्षेत्र के किसान परंपरागत खेती छोड़कर नई फसलों को बोने का प्रयोग करते रहते हैं। गुटैया क्षेत्र खेती में नए प्रयोग और नगदी देने वाली फसलाें को बोए जाने के लिए मशहूर हो चुका है। इस क्षेत्र से गन्ने का क्षेत्रफल नाममात्र का ही रह गया है। साठा धान, मक्का आदि के बाद अब खीरा, खरबूजा, तरबूज, तोरई आदि पर किसानों ने फोकस करना शुरू कर दिया है। गुटैया क्षेत्र के अलावा रामपुर कलां, मीरपुर, गंगाई, पकड़िया हकीम, बहादुरपुर आदि में खीरा और तरबूज की लगभग तीन सौ एकड़ खेती की गई है। खीरे को यहां से सीधे दिल्ली की मंडी में भेजा जा रहा है। वर्तनाम फसल के बाद खीरे की एक और फसल की तैयारी की जा रही है। 
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किसानों ने बताया कि खरबूजा और खीरे का बीज आठ हजार रुपये से लेकर 32 हजार रुपये प्रति किलो तक मिलता है। एक एकड़ खेत में चार सौ ग्राम बीज पड़ता है। खेत अगर ठेके पर लेना हो तो अप्रैल से मई तक तीन महीने के लिए 21 हजार रुपये प्रति एकड़ मिल जाता है। खीरा अप्रैल और खरबूजा मई में तैयार हो जाता है। खीरा शाहजहांपुर, खीरी, पीलीभीत और दिल्ली भेजा जाता है तो खरबूजे की सबसे ज्यादा मांग उत्तराखंड में है। किच्छा और ऊधम सिंहनगर के व्यापारी यहां से खरबूजा ले जाते हैं। इसके अलावा बहराइच, बरेली, नानपारा, सीतापुर आदि में भी खरबूजे की सप्लाई की जाती है। यदि फसल बढ़िया हो और बारिश आदि नहीं हो तो तीन महीने में लगभग एक लाख रुपया प्रति एकड़ की बचत हो जाती है। 

सरकार प्रयास करे तो बढ़ सकती है खेती
खीरा, तरबूज, खरबूजा, तोरई आदि की खेती का काम बेहद कच्चा है। जरा सी बारिश पॉलेज को भारी नुकसान पहुंचा देती है। इसके अलावा पॉलेज में लगने वाले झुलसा, मकड़ी सहित तमाम रोग इसे भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे बचने के लिए फसल में लगातार कीटनाशक दवाओं को स्प्रे करना पड़ता है। तीन महीने में लगभग 90 स्प्रे हो जाते हैं। स्प्रे करने वाली दवाएं काफी महंगी होने के कारण इस पर भारी खर्चा आता है। दवाओं को अनुदान पर दिए जाने से किसानों को काफी राहत मिल सकती है और खीरा, खरबूजा की खेती को बढ़वा मिल सकता है। इसकी खेती बढ़ने से साठा धान का क्षेत्रफल कम होने से भूगर्भीय जल संरक्षण में भी मदद मिल सकती है। 

शाहजहांपुर में हो बिक्री की व्यवस्था
खीरे के लिए दिल्ली और खरबूजे के लिए उत्तराखंड के व्यापारी माल को खेत से ही उठा लेते हैं, लेकिन प्रशासन प्रयास कर शाहजहांपुर मंडी में व्यापारियों को बुलाने की व्यवस्था करे तो नीलामी होने से अधिक लाभ हो सकता है। 
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जितेंद्र कुमार पुवायां

तमाम लोगों को मिलता है रोजगार
खीरा, खरबूजा, तोरई आदि की खेती से तमाम लोगों को रोजगार मिलता है। बहुत से युवा खेत से खीरा, खरबूजा खरीदकर रोड के किनारे ठेला लगाकर बिक्री कर बढ़िया मुनाफा कमा लेते हैं। इस खेती को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। 
सुरेश कुमार पुवायां
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