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सरकारी आवास खाली कराने पर भड़के जिला अस्पताल कर्मचारी, हंगामा

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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का स्टाफ सरकारी आवासों को लेकर शनिवार सुबह आमने-सामने आ गए और जमकर हंगामा हुआ। मेडिकल कॉलेज आवास आवंटन समिति की ओर से नोटिस देने के बाद आवास खाली करने को कहने पर जिला अस्पताल के कर्मचारी भड़क गए और विरोध में करीब दो घंटे काम बंद रखा। बातचीत के दौरान जिला अस्पताल कर्मियों और प्राचार्य व आवास आवंटन समिति अधिकारियों से तीखी नोकझोंक हुई। बाद में प्राचार्य और सीएमएस ने नोटिस को रद्द करने का आश्वासन देकर विवाद निपटाया।
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दरअसल जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज एक ही परिसर में बने हैं। वहां बने सरकारी आवासों में दोनों में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी रहते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज की आवास आवंटन समिति ने जिला अस्पताल के आवासीय परिसर में रह रहे इलैक्ट्रीशियन अशोक कुमार शुक्ला, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सावित्री, सेवानिवृत्त स्टाफ नर्स एडलिन सिंह, प्रियंका, निर्मला देवी और उर्मिला को नोटिस जारी कर दो दिन में सरकारी आवास खाली करने को कहा था। आवास खाली न करने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। नोटिस प्रभारी आवास आवंटन अधिकारी राजकीय मेडिकल कॉलेज डॉ. अमित सूद की ओर से जारी किए गए थे। शनिवार सुबह करीब नौ बजे समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी गौतम इन कर्मचारियों के आवास पर पहुंचे और तत्काल आवास खाली करने को कहा। इस पर कर्मचारी भड़क गए। जिला अस्पताल के समस्त नर्सिंग स्टाफ ने कर्मचारी नेता ललित मोहन और संदेश कुमार के नेतृत्व में कार्य बहिष्कार कर दिया और मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हंगामा होने की खबर पाकर डॉ. ओपी गौतम और प्राचार्य डॉ. अभय सिन्हा कर्मचारियों से वार्ता करने पहुंचे तो उनमें जमकर नोकझोंक होने लगी। कर्मचारी मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर शोषण का आरोप लगा रहे थे। बाद में प्राचार्य डॉ. अभय सिन्हा, सीएमएस डॉ. एमपी गंगवार ने कर्मचारियों के शिष्टमंडल को मीटिंग हॉल में बातचीत के लिए बुलाया और नोटिस को रद्द करने का आश्वासन दिया। तब कर्मचारी मान गए और सुबह करीब 11:30 बजे दोबारा काम पर लौट गए।
स्टाफ नर्स के पति को धक्का दिया तो बैठक से उठे
शाहजहांपुर। कार्य बहिष्कार के दौरान वहां पहुंचे प्राचार्य डॉ. अभय सिन्हा और आवास आवंटन समिति अध्यक्ष डॉ. ओपी गौतम, सीएमएस डॉ. एमपी गंगवार ने कर्मचारियों को वार्ता के लिए मीटिंग हॉल में बुलाया तो स्टाफ नर्स निर्मला देवी के पति अरविंद कुमार भी अंदर जाने लगे। इस पर एक डॉक्टर ने अरविंद कुमार को धक्का देकर बाहर निकाल दिया। धक्का देने के बाद कर्मचारी उठ गए और बाहर जाने लगे। तब सीएमएस ने स्थिति संभाली और सभी को वार्ता करने के लिए जैसे तैसे रोक लिया।
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आवास आवंटन समिति की ओर से गलत नोटिस जारी कर दिया गया था। इस नोटिस की दोबारा जांच कराई जाएगी। फिलहाल नोटिस को रद्द कर दिया गया है। कर्मचारियों से वार्ता सफल रही है। अब उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। - डॉ अभय सिन्हा प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
प्राइवेट वार्डों पर जूनियर डॉक्टरों का कब्जा
जिला महिला और पुरुष चिकित्सालय में कुल 16 प्राइवेट वार्ड हैं। जिला महिला अस्पताल के सभी आठ प्राइवेट वार्डों में जेआर (जूनियर डॉक्टर) रह रहे हैं। पुरुष चिकित्सालय के चार प्राइवेट वार्डों में जेआर रहते हैं। इसको लेकर जिला अस्पताल कर्मी विरोध जता रहे थे। हालांकि प्राचार्य डॉ अभय सिन्हा का तर्क था कि वैकल्पिक व्यवस्था के मद्देनजर जेआर को प्राइवेट वार्डों में ठहराया गया है।
पहले भी कई बार हो चुका है विवाद
मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल स्टाफ के बीच पहले भी विवाद हो चुका है। विवाद के चलते हड़ताल भी हुई थी। विवाद की शुरुआत सबसे पहले जिला अस्पताल की डॉ. किरन गुप्ता को मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से ओपीडी में बैठने से रोकने पर हुई थी। तब कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया था। इसके बाद डॉ. अनिल राज के साथ यही बर्ताव किया गया था। तब भी हड़ताल की गई थी। पूर्व मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से कर्मचारियों की तनातनी रहने के चलते भी कार्य बहिष्कार किया जा चुका है।
कर्मचारी हड़ताल पर , भटकते रहे मरीज
शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जिला अस्पताल कर्मियों के बीच चल रही तनातनी का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ता है। शनिवार सुबह जिला अस्पताल कर्मियों के कार्य बहिष्कार करने से मरीज करीब दो घंटे तक इधर-उधर भटकते रहे।
ऑटो पलटने से मैं घायल हो गया था। जब यहां पहुंचे तो पता चला कि हड़ताल हो गई है। काफी देर तक मैं तड़पता रहा। करीब दोपहर 12 बजे चिकित्सक और स्टाफ आया। तब जाकर कहीं इलाज हो सका। - राजेश कुमार, मौजमपुर
मुझे कुत्ते ने काट लिया था। 11 जनवरी को दूसरा इंजेक्शन लगने के लिए यहां बुलाया गया था। जब यहां आए तो इंजेक्शन रूम में कोई भी बैठा नहीं मिला। नियत तारीख पर इंजेक्शन नहीं लग पाया। - पूनम
मुझे कुत्ते ने काट लिया था। आज यहां पहली बार इंजेक्शन लगवाने के लिए आए थे। न तो चिकित्सक मिल सके और न ही पर्चा बन पाया। काफी देर तक इधर-उधर भटकते रहे। अब वापस जाना पड़ रहा है। - कैलाशो
पैर में घाव हो जाने के चलते यहां दिखाने आया था। अस्पताल में कोई भी नहीं मिला, जिसे दिखा सके। पता चला कि हड़ताल हो गई है। इतनी दूर से जिला अस्पताल दिखाने आए थे। अब बिना इलाज के ही वापस जाना पड़ रहा है। - बाबूराम
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